बचत खूब : बिजली से दौड़ रहे हजारों वाहन, खर्च आधा
भी नहींशहर की वायु गुणवत्ता सुधारने पर निगम दे रहा जोर
शहर में दौड़ रहे उन लोडिंग व सवारी रिक्शाओं पर नगर निगम की नजर है, जो डीजल-घासलेट से चल रहे हैं और सबसे ज्यादा धुआं छोडक़र प्रदूषण फैला रहे हैं। इनकी जगह निगम ई-रिक्शा चलाने पर जोर दे रहा है, ताकि शहर कि वायु गुणवत्ता में सुधार हो। लोगों को ई रिक्शा खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभी लोडिंग रिक्शा चलाने पर चालकों को डीजल का प्रतिदिन लगभग 400 से 500 रुपए व्यय होता है, जो ई रिक्शा चलाने से बचेगा और आबो-हवा में सुधार होगा। गौरतलब है कि सियागंज, हाथीपाला, लोहा मंडी, सरवटे बस स्टैंड, जवाहर मार्ग, छावनी और इससे लगे हुए क्षेत्रों में धुआं छोडऩे वाले लोडिंग रिक्शा चलते हैं। धुआं उड़ाने वाले सवारी रिक्शा पूरे शहर में घूमते हैं।
डेढ़ घंटे में चार्ज हो रही कार
ई-व्हीकल शासन की प्राथमिकता है। पश्चिम क्षेत्र बिजली कंपनी भी इन्हें प्रोत्साहित कर रही है। कंपनी ने ई-व्हीकल का उपयोग शुरू कर दिया है। हमारे चार्जिंग स्टेशन में डेढ़ घंटे में कार चार्ज हो जाती है। चार्जिंग स्टेशन और घरों पर वाहन चार्ज करने के लिए शासन ने कई तरह सुविधा दी है। ई-व्हीकल परंपरागत ईंधन खर्च में कटौती के अलावा पर्यावरण सुधार के लिए भी कारगर व आसान उपाय है।






