भांजे दामाद की सांप काटने से हुई मौत, आहत होकर सांप पकड़ने लगे, 10 साल में कई प्रजाति के 1509 सांप पकड़ चुके हैं
इंदौर/बेटमा. रामनिवास दाऊ इंदौर के बेटमा क्षेत्र के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं। लोग उन्हें दाऊ कहकर भी बुलाते हैं। राजनीति छोड़कर अब समाज सेवा में लगे हैं। वह दिन-रात की परवाह किए बगैर लोगों के घर, संस्थान, गांव, खेतों से सांपों को पकड़ते हैं। पिछले 10 साल में कई खतरनाक प्रजातियों के 1509 सांप पकड़ चुके हैं। कई बार उन्होंने अपनी जान जोखिम में भी डाली है। वह न केवल सांपों को पकड़ते हैं, बल्कि घायल सांपों का इलाज कर उन्हें जंगल में छोड़ देते हैं। वह समाजसेवी, प्रकृति प्रेमी भी हैं।
अब तक वे घोड़ा पछाड़, किंग कोबरा, दिवड, अजगर, चितावल, धामन, वाटर मोकविन जैसे डेढ़ हजार से ज्यादा सांप पकड़ चुके हैं। यदि कोई आधी रात को भी उन्हें सांप पकड़ने के लिए बुलाता है, तो वह तैयार हो जाते हैं। खास बात है कि ये सब वह नि:शुल्क करते हैं। अगर कोई रुपया देता है, तो उसे वह निर्धन बच्चों की शिक्षण सामग्री में खर्च करते हैं।
सांप के डसने से भांजी के पति की हुई थी मौत
रामनिवास दाऊ ने बताया, एक घटना ने उनका जीवन बदल दिया। दरअसल, कुछ साल पहले उन्होंने भाइयों के साथ मिलकर भांजी की शादी की थी। विदाई के बाद ससुराल पहुंची। दूल्हा अपनी दुल्हन का चेहरा भी नहीं देख पाया था कि उसे सांप ने काट लिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उस घटना ने परिवार काे बहुत आहत किया। इसके बाद उन्होंने सांपों की प्रजातियों के बारे में जानना शुरू किया। उनके जहर प्रकृति ओर उसके इलाज के बारे में जानकारी जुटाई। शास्त्र, पुराणों का अध्ययन किया। यहां तक कि सांप पकड़ने की ट्रेनिंग भी ली। 2010 से सांप पकड़ने का काम शुरू किया।
ग्रामीण इलाकों में सांपों को मारने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं होता है। कई बार सांप घायल अवस्था में पड़े रहते हैं। तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो जाती है। दऊ ने सांपों के लिए 6 प्रकार की जड़ी बूटियों का औषधीय घोल बनाया है जो घायल सांपों को लगाया जाता है, जिससे उनकी चमड़ी जल्द बनकर तैयार हो जाती है।
नगर का पहला सूचना केंद्र भी स्थापित कर चुके हैं
अब तक 2558 गुमशुदा बच्चों को अपने माता-पिता से मिलवा चुके हैं। नगर का पहला सूचना केंद्र उन्होंने 1977 में लगाया था, जहां से वे शोक संदेश, सामाजिक धार्मिक आयोजनों की जानकारी, शासन की योजनाएं, दुर्घटनाएं, आगजनी और गुम हुई वस्तुओं की सूचनाएं देते आ रहे हैं। बीते 43 वर्षो में 40 हजार से अधिक सूचनाएं दे चुके हैं।
दाऊ लंबे समय से सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं। कई सामाजिक व धार्मिक संगठन उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।







