सरकार का बड़ा बयान- 2022 तक कच्चे तेल के आयात में लाएंगे 10% कमी, नये ऊर्जा स्रोत पर ध्यान

सरकार का बड़ा बयान- 2022 तक कच्चे तेल के आयात में लाएंगे 10% कमी, नये ऊर्जा स्रोत पर ध्यान

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान आत्मनिर्भर भारत पर स्वराज्य वेबिनार में शामिल हुए. कार्यक्रम में बोलते हुए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि हमारी सरकार ने 2022 तक भारत के कच्चे तेल के आयात को 10% तक कम करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है. हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई रणनीतियों और पहलों को विकसित करने की प्रक्रिया में हैं. इसके लिए स्वदेशी तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि इस क्रम में दिल्ली में हाइड्रोजन समृद्ध-संपीड़ित प्राकृतिक गैस संयंत्र और वितरण स्टेशन शुरू किए हैं और एचसीएनजी चालित बसों का पहला बेड़ा भी परिचालन में आ गया है.

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि भारत कच्चे तेल का उचित और अनुकूल मूल्य निर्धारित करने की ओर अग्रसर है. इसलिए अब उत्पादों को उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण को भी ध्यान में रखना होगा. पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया की प्राथमिक ऊर्जा का केवल 6% उपयोग कर रहा है और उसकी ऊर्जा की प्रति व्यक्ति खपत अभी भी वैश्विक औसत का एक तिहाई है.

लेकिन, यह परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. भारत वैश्विक ऊर्जा मांग में वृद्धि को बढ़ावा देना. क्योंकि इसकी ऊर्जा खपत 2040 तक 3% प्रति वर्ष तक बढ़ने का अनुमान है, जो दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेज है. कुल वैश्विक प्राथमिक ऊर्जा मांग में भारत की हिस्सेदारी 2040 तक दोगुनी होकर लगभग 11% होने का अनुमान है, जो मजबूत आर्थिक विकास से प्रेरित है.

प्रधान ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा खपत के बारे में एक स्पष्ट रोडमैप की कल्पना की है, जो कि 5 प्रमुख समर्थकों पर आधारित है- ऊर्जा उपलब्धता और सभी के लिए उसकी सुलभता, देश के गरीब-से-गरीब व्यक्ति की उस तक पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा की सुरक्षा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की ऊर्जा रणनीति के सात प्रमुख वाहकों पर प्रकाश डाला है.

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