भोपाल । कोरोना लॉकडाउन के चलते उद्योग-धंधों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भोपाल । कोरोना लॉकडाउन के चलते उद्योग-धंधों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके चलते इन कंपनियों के संचालकों के सामने कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ रहे हैं। इसकी वजह है उनका काम-धंधा तो ठप है ही ऐसे में वे अपने मजदूरों और कर्मचारियों को मार्च का वेतन नहीं दे पा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी परेशानी तनख्वाह का हिसाब रखने वालों से लेकर चेक साइन कराने और फिर उन कर्मचारियों तक पहुंचाने की है। यही नहीं जो कंपनियां सरकार के लिए बिजली उपकरण बनाने का काम करती हैं उन्हें जनता कफ्र्यू के बाद से भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इससे इन कंपनियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस क्षेत्र की अधिकांश कंपनियों का मानना है कि लॉकडाउन के बाद परिस्थितियां और कठिन हो जाएंगी। यही वजह है कि कोरोना लॉकडाउन से बंद पड़े उद्योग-धंधों में प्रदेश के बिजली उपकरण और इससे संबंधित सामग्री बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां सरकारों से अपने भुगतान में राहत की अपेक्षा कर रही हैं। प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में करीब दो दर्जन ऐसी इकाइयां हैं जो बिजली के ट्रांसफार्मर, कंडक्टर, कैबल-तार आदि बनाकर न केवल केंद्र और राज्य सरकारों के संस्थानों को सप्लाई करती हैं, बल्कि विदेशों में भी उनकी सप्लाई है। इन कंपनियों में 22 मार्च के जनता कफ्र्यू के बाद से ही पूरी तरह से काम बंद है। राज्य सरकार को जो कंपनियां सामग्री की सप्लाई करती हैं, उन्हें मार्च के तीसरे सप्ताह से भुगतान बंद है। प्रदेश में बिजली के उपकरण बनाने वाली कंपनियों में से कुछ मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनियों व पॉवर कंपनियों के लिए काम करती हैं तो कुछ राज्य सरकार के ऑफिसों की जरूरतों को पूरा करती हैं तो कुछ बीएचईएल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड) की सहायक ईकाई के रूप में काम करती हैं। बिजली उपकरण बनाने वाली कंपनियों में से कुछ रेलवे व एनटीपीसी व अन्य केंद्रीय संस्थानों के लिए बिजली उपकरण व सामग्री बनाती है। भोपाल, इंदौर, रतलाम, सतना सहित कई स्थानों पर ये कंपनियां काम कर रही हैं।

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