यूपीआई पेमेंट पर व्यापारियों को देना पड़ सकता है शुल्क

यूपीआई पेमेंट पर व्यापारियों को देना पड़ सकता है शुल्क*
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों से भविष्य में एक निश्चित सीमा के बाद मामूली शुल्क लिया जा सकता है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में टैक्स संबंधी नियमों में संशोधन विधेयक पेश किया, जिसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव है। इससे यूपीआई और रुपे कार्ड से भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का रास्ता खुल सकता है। वर्तमान में इस कानून के तहत बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं वसूल सकते। प्रस्तावित संशोधन के बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) शुल्क की दर और उसकी सीमा तय करेगा। सूत्रों के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों से 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक एमडीआर लिया जा सकता है। हालांकि, इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा और उन्हें भुगतान की राशि से अधिक रकम नहीं चुकानी होगी। विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि 50 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारी भी भीम यूपीआई क्यूआर कोड और रुपे कार्ड के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर सकेंगे। इसके लिए भुगतान सीमा भी एनपीसीआई द्वारा निर्धारित की जाएगी।

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