ज्योतिर्गमय, ऋतु संहार और उत्तिष्ठ भारत काव्य संग्रह लोकार्पित

ज्योतिर्गमय, ऋतु संहार और उत्तिष्ठ भारत काव्य संग्रह लोकार्पित

इंदौर।दिल्ली की सुपरिचित साहित्यकार, हृदय चिकित्सक डॉ. नीलम वर्मा की 3 कृतियों, ज्योतिर्गमय, ऋतु संहार और उत्तिष्ठ भारत काव्य संग्रहों का लोकार्पण श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति के सभागार में संस्कृत के विभागाध्यक्ष डॉ. विनायक पाण्डेय की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति, संस्कार संस्कृत में लिखे ग्रंथों में समाया हुआ है। समय की माँग है कि उन्हें सरल गद्य/पद्य में लिखकर जन-जन तक पहुँचाया जाये। ऋग्वेद संहिता का काव्य रुपान्तर ‘ज्योतिर्गमय’ पर डॉ. आरती दुबे ने समीक्षा प्रस्तुत की। कालिदास के ‘ऋतु संहार’ के भावपूर्ण काव्य रुपान्तर पर डॉ. शोभा प्रजापति ने अपने विचार व्यक्त किए। वहीं श्रीमद् भगवद्गीता के पद्य रुपान्तर ‘उत्तिष्ठ भारत’ कृति पर हरेराम वाजपेयी ने बातें की। सभी ने संस्कृत के इन तीनों ग्रंथों के हिन्दी पद्य रुपान्तर के लिए डॉ. नीलम वर्मा की प्रशंसा की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, दिल्ली से आई अर्यमा सान्याल एवं श्री उमेश मेहता ने भी विचार व्यक्त किए। कृतिकार डॉ. नीलम वर्मा ने अपने लेखन के सन्दर्भ विचार व्यक्त किया। आरम्भ में दीप प्रज्ज्वलन पश्चात माँ सरस्वती की अर्चना की गई। सरस्वती वन्दना पूजा कृष्णा ने सस्वर प्रस्तुत कर वातावरण को काव्यमय बना दिया। अतिथियों का स्वागत सर्वश्री सदाशिव कौतुक, सन्तोष मोहन्ती, डॉ. अरुणा सराफ, पत्रकार मीना निमजे, आर.डी. माहोर ने किया। लेखिका का स्वागत हिन्दी परिवार की ओर से अध्यक्ष एवं शोभारानी तिवारी, प्रदीप नवीन, डॉ. शशि निगम, श्याम बागोरा, ज्योति जैन आदि ने किया। कार्यक्रम का सरस संचालन तृप्ति मिश्रा ने किया। अतिथि परिचय संयोजक हरेराम वाजपेयी ने व आभार डॉ. नीलम वर्मा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. कृष्णा जोशी, वाणी अमित जोशी, श्री अरविन्द जवलेकर, राजेश शर्मा, दिनेश तिवारी ‘उपवन’, दिनेश दवे, उमेश पारीख, डॉ. अखिलेश राव, डॉ. पुष्पेन्द्र दुबे, इन्दु पाराशर, राजेन्द्र पाण्डे, लक्ष्मीनारायण उग्र, बालकराम साद, डॉ. पद्मा सिंह आदि काफी संख्या में साहित्यकार-सुधीजन उपस्थित थे।

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