हम किसी को नाम बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

हम किसी को नाम बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट*
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांवड़ मार्ग प पर भोजनालयों, फलों की दुकानों पर मालिकों और कर्मियों के नाम प्रदर्शित करने पर रोक का अपना आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हम किसी को नाम बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकार से अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस हृषिकेश रॉय और एस. वी. एन. भट्टी की पीठ ने कहा कि हमने 22 जुलाई को दिए अंतरिम आदेश में जो कुछ कहना था कह दिया। पीठ ने कहा कि वह कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं करेगी। इसके साथ ही, पीठ ने मामले की सुनवाई 5 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। मामले की सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ से कहा कि यूपी सरकार ने गुरुवार को रात साढ़े 10 बजे अपना जवाब दाखिल किया है। उन्होंने कहा, जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए उन्हें थोड़ा वक्त चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा कि हलफनामा अदालत के रिकार्ड पर नहीं है। दूसरी तरफ, यूपी सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि उन्होंने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने कांवड़ मार्ग पर कानून के तहत भोजनालयों और दुकान मालिकों और कर्मियों के नाम अनिवार्य रूप से लिखने का निर्देश जारी किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले की सुनवाई सोमवार को करने का आग्रह किया और कहा कि अन्यथा यह मामला निरर्थक हो जाएगा। मध्य प्रदेश की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि उज्जैन नगर निगम ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।

1809 views