नकलची व भाजपा सरकार को बचाने वाला बजट: मल्लिकार्जुन खरगे*
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की तरक्की वाला नहीं, बल्कि मोदी सरकार बचाओ बजट पेश किया है। सरकार ने अपने गठबंधन के साथियों को ठगने के लिए आधी-अधूरी रेवड़ियां बांटी हैं, ताकि एनडीए बचा रहे। 10 साल बाद उन युवाओं के लिए सीमित घोषणाएं हुई, जो सालाना दो करोड़ नौकरियों के जुमले को झेल रहे हैं। किसानों के लिए केवल सतही बातें हुईं। डेढ़ गुना एमएसपी व आय दोगुना करना… सब चुनावी धोखेबाजी निकली। दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, माध्य वर्ग व गांव-गरीब के लोगों के लिए कोई भी क्रांतिकारी योजना नहीं है। बजट में महिलाओं के लिए ऐसा कुछ नहीं है। महंगाई पर अपनी पीठ थपथपा रही सरकार जनता की गाढ़ी कमाई लूट कर पूंजीपति मित्रों में बांट रही है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, जन-कल्याण व आदिवासियों के बजट में आवंटन से कम खर्च किया गया, क्योंकि ये भाजपा की प्राथमिकताएं नहीं हैं। पूँजिगत व्यय पर एक लाख करोड़ रुपये कम खर्च किया गया, तो नौकरियां कहां से बढ़ेंगी? शहरी व ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, एमएसएमई, निवेश, इलेक्ट्रिक वाहन योजना पर कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई। रेलवे के बारे में कुछ नहीं कहा गया। जनगणना व जातीय गणना पर चुप्पी रही। 20 मई, 2024 को पीएम मोदी ने दावा किया था कि उनके पास 100 दिनों की कार्ययोजना तैयार है, तो कम से कम बजट में ही बता देते।






