31 मार्च तक बंद हो सकते हैं देशभर के 1.13 लाख ATM

31 मार्च तक बंद हो सकते हैं देशभर के 1.13 लाख ATM
इस महीने के अंत तक देश के आधे ATM बंद हो सकते हैं। कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री यानी CATMi की तरफ से आई सूचना के अनुसार ATM बंद होने के पीछे की वजह तकनीकी अपग्रेड को बताया है। CATMi ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ATM हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड और नकदी प्रबंधन योजनओं के हालिया मानकों के चलते मार्च 2019 तक संचालन के अभाव में 50 फीसदी एटीएम बंद हो जाएंगे।
लगातार बढ रहा ATM के रखरखाव का खर्च
देश में हैं कुल 2.38 लाख एटीएम
CATMi के प्रवक्ता ने कहा कि भारत में इस समय तकरीबन 2,38,000 ATM हैं, जिनमें से एक लाख ऑफ-साइट और 15,000 से अधिक व्हाइट लेबल ATM समेत कुल 1,13,000 ATM बंद हो सकते हैं।
ATM हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने के लिए विनियामक दिशानिर्देश, नकदी प्रबंधन मानकों की हालिया शर्ते और कैश लोडिंग की कैसेट स्वैप पद्धति के कारण संगठन को ऐसा करना पड़ा। इनमें से अधिकांश गैर-शहरी क्षेत्रों के होंगे।
झेलना पड़ेगा 3,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ
नोटबंदी के बाद से 2000, 500, 200 और 100 रुपए के नए नोट चलन में हैं। इन नोटों का साइज अलग है। इसलिए अब नए नोटों के हिसाब से ATM के सिस्टम को भी बदला जा रहा है।
इसके लिए ATM में नोट रखने के खाचों (कैसेट) को भी बदला जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था को बदलने के लिए एटीएम इंडस्ट्री पर करीब 3,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
क्यों उठाया गया ये कदम?
नियमों में बदलाव से स्थिति अब और ज्यादा खराब हो गई है। एटीएम सेवाएं देने वाली कंपनियों के पास अतिरिक्त बजट को पूरा करने के लिए कोई अलग से वित्तीय साधन नहीं हैं, इसलिए ATM को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
इडस्ट्री का कहना है कि इस हालात से तभी बाहर निकला जा सकता है जब बैंक इन नियमों के अनुपालन पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को खुद वहन करें।
ATM सर्विस पड़ रही महंगी
पिछले कुछ वक्त से देश में ATM लगाने की सर्विस से होने वाली आय नहीं बढ़ी है। इसकी वजह बहुत कम ATM इंटरचेंज चार्जेस और लगातार बढ़ती लागत है।
अगर बैंकों द्वारा एटीएम संचालक कंपनियों को इस अतिरिक्त खर्च के लिए मुआवजा नहीं दिया जाता है तो उन्हें अपनी सर्विस से सरेंडर करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा।
जिसके कारण बड़ी संख्या में एटीएम बंद हो जाएंगे। एटीएम एक सेवा है, इसलिए इस सिस्टम से बहुत ज्यादा राजस्व की उम्मीद नहीं की जा सकती है, जबकि इनकी लागत और इनके संचालन का खर्च बढ़ रहा है।

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