ब्रह्माकुमारिज संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी की पहली पुण्य तिथि पर रतलाम के दिव्य दर्शन भवन डोंगरे नगर सेवाकेंद्र पर दिव्यता दिवस के रूप में मनाया गया

रतलाम / ब्रह्माकुमारिज संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी की पहली पुण्य तिथि पर रतलाम के दिव्य दर्शन भवन डोंगरे नगर सेवाकेंद्र पर दिव्यता दिवस के रूप में मनाया गया दिव्यता दिवस के रूप में मनाया गया । रतलाम सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने दादी की विशेषताओं से सबको अवगत कराते हुए कहा कि दादी जी बेमिसाल अनूठी तपस्या की धनी एवं सरलता व् सौम्यता की प्रतिमूर्ति थी आप मात्र 9 वर्ष की आयु में ही संस्थान से जुड़ गई हैं। आपको बचपन से दिव्य दृष्टि का वरदान प्राप्त था। वर्ष 1969 में संस्थान के संस्थापक पिताश्री प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद आपने अपनी दिव्य दृष्टि की शक्ति से लाखों भाई-बहनों का परमात्म संदेश सुनाकर संदेशवाहक की भूमिका निभाई। आपको सभी प्यार से दादी गुलजार भी कहते थे।आदरणीय दादी जी ने ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, हालैंड, पोलैंड,अफ्रीका, कैनेडा, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, ब्राजील,मेक्सिको, आदि कई पूर्वी व पश्चिमी देशों में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सेवाएं दी तथा आध्यात्मिकता फिलासफी, राजयोग,आर्ट आफ लिविंग आदि विषयों में अपने व्याख्यान दिए। दादी के योग-तपस्या का ही कमाल था कि आपके संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आपकी तपस्या की दिव्य अनुभूति होती थी। आपका दिव्य और तेजस्वी चेहरा रुहानियत से भरपूर था। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी गीता दीदी , समाजसेवी राजेंद्र पोरवाल , कन्हैयालाल मेहता जी , नरेन्द्र महेश्वरी ,महेंद्र कौशिक ,ओमप्रकाश शाक्य अशोक कौशल,अनिल तलोदियातथा संस्था के सभी भाई बहनों द्वारा दादी जी को भावभीनी श्रंद्धाजलिअर्पित किया गया।

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