शिवसेना मुखपत्र में UPA को बताया NGO, शरद पवार को गठबंधन का अध्यक्ष बनाने की वकालत

शिवसेना मुखपत्र में UPA को बताया NGO, शरद पवार को गठबंधन का अध्यक्ष बनाने की वकालत

कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के गठबंधन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए के अध्यक्ष पद के लिए शिवेसना ने शरद पवार का समर्थन किया है. बीते कुछ हफ्तों से यूपीए अध्यक्ष के नाम पर विपक्षी दलों में बहस जारी है. फिलहाल कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी यूपीए की अध्यक्ष हैं. अगले साल जनवरी में सोनिया इस पद से हट जाएंगी. माना जा रहा है कि इसके बाद पवार यूपीए के अध्यक्ष बनेंगे. जानकारी के मुताबिक सोनिया गांधी ने पद पर बने रहने की अनिच्छा जाहिर की है. सोनिया का मानना है कि इस पद के लिए उपयुक्त नेता जल्द ही मिल जाएगा. अब माना जा रहा है कि शरद पवार यूपीए अध्यक्ष पद के सबसे मजबूत प्रत्याशी हैं.

इसी मुद्दे पर शिवेसना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में भी पवार के यूपीए अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत की गई है. यूपीए की तुलना एनजीओ से करते हुए सामना के संपादकीय में कहा गया है कांग्रेस के नेतृत्व में एक यूपीए नामक राजनीतिक संगठन है. उस यूपीए की हालत एकाध एनजीओ की तरह होती दिख रही है. यूपीए के सहयोगी दलों द्वारा भी देशांतर्गत किसानों के असंतोष को गंभीरता से लिया हुआ नहीं दिखता. यूपीए में कुछ दल होने चाहिए लेकिन वे कौन और क्या करते हैं? इसको लेकर भ्रम की स्थिति है.

सामना की संपादकीय में कहा गया है- शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को छोड़ दें तो यूपीए की अन्य सहयोगी पार्टियों की कुछ हलचल नहीं दिखती. शरद पवार का एक स्वतंत्र व्यक्तित्व है, राष्ट्रीय स्तर पर है ही और उनके वजनदार व्यक्तित्व तथा अनुभव का लाभ प्रधानमंत्री मोदी से लेकर दूसरी पार्टियां भी लेती रहती हैं.

कांग्रेस के भविष्य पर प्रश्न करते हुए मुखपत्र सामना की संपादकीय में कहा गया है पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अकेले लड़ रही हैं. भारतीय जनता पार्टी वहां जाकर कानून-व्यवस्था को बिगाड़ रही है. केंद्रीय सत्ता की जोर-जबरदस्ती पर ममता की पार्टी को तोड़ने का प्रयास करती है. ऐसे में देश के विरोधी दलों को एक होकर ममता के साथ खड़ा होने की आवश्यकता है. लेकिन इस दौरान ममता की केवल शरद पवार से ही सीधी चर्चा हुई दिखती है तथा पवार अब पश्चिम बंगाल जानेवाले हैं. यह काम कांग्रेस के नेतृत्व को करना आवश्यक है. कांग्रेस जैसी ऐतिहासिक पार्टी को गत एक साल से पूर्णकालिक अध्यक्ष भी नहीं है. सोनिया गांधी यूपीए की अध्यक्ष हैं और कांग्रेस का कार्यकारी नेतृत्व कर रही हैं. उन्होंने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है. लेकिन उनके आसपास के पुराने नेता अदृश्य हो गए हैं. मोतीलाल वोरा और अहमद पटेल जैसे पुराने नेता अब नहीं रहे.

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