प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी से निपटने के लिए कमलनाथ सरकार कई तरह के नवाचार कर रही है।

भोपाल । प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी से निपटने के लिए कमलनाथ सरकार कई तरह के नवाचार कर रही है। इसके तहत अब सरकार ने बेरोजगार युवाओं को जमीन देकर उन्हें फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। दरअसल यह फैसला फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए किया गया है। इसके तहत अब सरकार बेरोजगार युवाओं को जमीन देकर फूलों की खेती करवाएगी। इसके लिए एक से ढाई एकड़ जमीन 30 साल की लीज पर दी जाएगी। एक एकड़ जमीन के लिए 5 लाख रुपए देना होंगे। इससे युवाओं को तो रोजगार मिलेगा ही प्रदेश भी उद्यानिकी और फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण योजना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। माना जा रहा है कि कमलनाथ कैबिनेट की अगली बैठक में यह प्रस्ताव रखा जा सकता है। इस योजना के तहत पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में होशंगाबाद और छिंदवाड़ा जिले में सौ-सौ एकड़ जमीन पर युवाओं से फूलों की खेती करवाने का प्रस्ताव है। बाद में यह योजना प्रदेश के दूसरे जिलों में भी लागू की जाएगी। यही नहीं फूलों की खेती में मददगार पॉली हाउस, ग्रीन हाउस और स्प्रिंक्लर सहित अन्य उपकरणों के लिए भी सरकार अनुदान देगी। अगर युवाओं को इसके बाद भी खेती के लिए बैंक से कर्ज की जरूरत पड़ती है तो सरकार इसमें भी मदद करेगी।
एमआईडीसी की तर्ज पर होगा काम
महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमआईडीसी) पूना की तर्ज पर पूरे प्रदेश में फूलों की अलग-अलग वेरायटी की खेती कराने योजना तैयार की गई है। सरकार इस योजना में चयनित होने वाले युवाओं को पहले पूना ले जाकर वहां की खेती का मॉडल दिखाएगी ताकि वे यहां आकर उसी तरह से काम कर सके। पॉइलेट प्रोजेक्ट के रूप में होशंगाबाद और छिदवाड़ा जिलों में ग्रीन लैंड विकसित की गई है। यहां बिजली, पानी, सडक़ और वातानुकूलित गोदामों की व्यवस्था भी की जाएगी।
युवाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण
फ्लोरीकल्चर की नई एवं वैज्ञानिक तकनीक का प्रशिक्षण हार्टीकल्चर विभाग दिलाएगा। वहीं मिट्टी, खाद और पानी के परीक्षण के साथ ही युवाओं को पूरा सेटअॅप जमाने के लिए विभाग कंसल्टेंसी भी उन्हें उपलब्ध कराने में मदद करेगा। यहां विशेष प्रकार के फूलों की खेती की जाएगी, जिनकी डिमांड विदेश और दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े महानगरों में ज्यादा है।
अंतराष्ट्रीय स्तर पर फूलों के कारोबार करने वाले व्यापारियों से भी युवाओं का एमओयू कराया जाएगा, जिससे वे इनके माध्यम से अपने फूल देश और विदेशों बड़ी मंडियों में बेंच सके। फूलों को बेंचने के लिए मार्केट उपलब्ध कराने का काम हार्टीकल्चर विभाग करेगा। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों के पास एक छोटे-छोटे गोदाम बनाए जाएंगे, जहां युवा अपने फूलों को कुछ दिनों तक सुरक्षित भंडारण कर सकें।
ग्रीनबेल्ट का किया जाएगा उपयोग
फूलों की खेती गांव में कृषि भूमि और शहरों में ग्रीन बेल्ट लैंड में की जा सकेगी। ग्रीन बेल्ट लैंड में आधे एकड़ से लेकर पांच एकड़ तक के क्षेत्रफल खेती में की जा सकेगी। सिंचाई की व्यवस्था नदी, तालाब और ट्यूबवेल के पानी से की जाएगी, लेकिन इसकी डिमांड पहले से युवाओं को जल संसाधन विभाग को देना होगी। जबकि शहरी क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था नगरीय निकायों के माध्यम से की जाएगी। अगर नगरीय निकाय पानी की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं तो युवाओं अपने स्तर पर व्यवस्था करना होगी

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