सबरीमाला विवाद पर फैसला पढ़ते हुए हुए चीफ जस्टिस ने कहा- धार्मिक प्रथाओं को सार्वजनिक आदेश,

सबरीमाला विवाद पर फैसला पढ़ते हुए हुए चीफ जस्टिस ने कहा- धार्मिक प्रथाओं को सार्वजनिक आदेश, नैतिकता और भाग 3 के अन्य प्रावधानों के खिलाफ नहीं होना चाहिए।

इस मामले को महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के तौर पर देखा जा रहा था। पहले भी कोर्ट ने फैसला देते हुए 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव माना था।
5 जजों के बेंच ने 3-2 के बहुमत से सबरीमाला विवाद को 7 जजों की बेंच को ट्रांसफर किया।

सबरीमाला विवाद पर फैसला पढ़ते हुए चीफ जस्टिस ने कहा जब तक धार्मिक नियम नैतिकता के खिलाफ न हो तब तक उनकी अनुमति होती है।

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