भोपाल । प्रदेश के बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए अब सरकार अंडा के साथ ही फल खिलाएगी। आंगनवाडिय़ों में आने वाले बच्चों की इच्छा पर निर्भर होगा की वह अंडा खाना चाहता है या फिर फल। दरअसल यह फैसला सरकार को लोगों द्वारा अंडा का व्यापक विरोध होने के बाद करना पड़ा है। डॉक्टरों की सलाह पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रस्ताव में संशोधन किया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा। प्रस्ताव में सरकार उन बच्चों को फल के रूप में सेब व केला देगी जो अंडा नहीं खाते हैं। दरअसल सरकार का मानना है कि अंडा में बड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है, इसलिए सरकार आंगनवाडिय़ों के बच्चों को अंडा देना अनिवार्य करने जा रही थी। विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में भेजने की तैयारी कर ली थी, लेकिन इसकी जानकारी बाहर आते ही हंगामा खड़ा हो गया। अंडा को लेकर सियासी घमासान शुरू हुआ तो विभाग को प्रस्ताव में संशोधन करने पर मजबूर होना पड़ा है।
आदिवासी अंचल से शुरु करने की थी तैयारी
विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर प्रदेश के आदिवासी बहुल विकासखंड और अति कुपोषित बच्चों वाले विकासखंडों में योजना शुरू करने का फैसला लिया था। मामला सामने आने के बाद भाजपा इसके खिलाफ खुलकर सामने आ गई। इस पर विभाग की मंत्री इमरती देवी ने कहा था कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है तो अंडा दिया जाएगा। फिर चाहे कोई विरोध करे। इस दौरान मंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले में डॉक्टरों से सलाह ली जाएगी, वे जरूरी बताएंगे तो ही अंडा बांटेंगे।






