इंदौर | 26 सितंबर 2026
*टैक्स ऑडिट की समय-सीमा बढ़ाने एमपीटीसीए ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया*
पोर्टल की तकनीकी खामियों और ऑडिट यूटिलिटी में देरी को बनाया आधार; 30 नवंबर तक समय बढ़ाने तथा लेट फीस-पेनल्टी से राहत की मांग
इंदौर। मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (एमपीटीसीए) ने टैक्स ऑडिट से जुड़े कर पेशेवरों एवं करदाताओं को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में रिट याचिका दायर की है। मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ एवं अन्य, रिट याचिका क्रमांक 40462/2026 के माध्यम से एसोसिएशन ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AB के अंतर्गत टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की निर्धारित समय-सीमा में राहत देने की मांग की है।
याचिका में मुख्य आधार इनकम टैक्स पोर्टल की तकनीकी समस्याएं, ऑडिट यूटिलिटी एवं संबंधित फॉर्म की देरी से उपलब्धता तथा यूटिलिटी में बार-बार किए गए संशोधन को बनाया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण टैक्स ऑडिट पूरा करने के लिए उपलब्ध प्रभावी समय काफी कम हो गया है।
यूटिलिटी देर से जारी होने और बार-बार संशोधन का मुद्दा
याचिका में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, विभिन्न ITR फॉर्म और संबंधित यूटिलिटी मई से अगस्त 2026 के दौरान जारी की गईं तथा इनमें बाद में संशोधन भी किए गए। एसोसिएशन का कहना है कि टैक्स ऑडिट की प्रक्रिया इन यूटिलिटी की उपलब्धता और उनके तकनीकी रूप से सुचारु संचालन पर निर्भर करती है। बार-बार संशोधन और तकनीकी समस्याओं के कारण पेशेवरों के कार्य में अतिरिक्त कठिनाई उत्पन्न हुई।
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि टैक्स ऑडिट केवल एक ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें खातों, वित्तीय विवरणों, बिक्री-खरीद, स्टॉक, जीएसटी रिटर्न, टीडीएस/टीसीएस, बैंक स्टेटमेंट, ऋण, देनदारियों, संबंधित पक्षों के लेन-देन सहित विभिन्न वित्तीय एवं कर संबंधी सूचनाओं की विस्तृत जांच शामिल होती है।
ITR की समय-सीमा बढ़ने से भी प्रभावित हुआ ऑडिट सीजन
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए गैर-कॉरपोरेट करदाताओं की आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाई गई। इसके कारण टैक्स ऑडिट के लिए उपलब्ध प्रभावी अवधि और कम हो गई।
एमपीटीसीए के अनुसार, एक ही अवधि में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं अन्य कर पेशेवरों को टैक्स ऑडिट के साथ-साथ अन्य वैधानिक अनुपालनों, जीएसटी संबंधी कार्य, टीडीएस, ट्रस्ट ऑडिट तथा अन्य पेशेवर दायित्वों का भी निर्वहन करना होता है।
पिछले वर्ष भी बढ़ाई गई थी ऑडिट रिपोर्ट की समय-सीमा
एसोसिएशन ने अपनी याचिका में वर्ष 2025 की स्थिति का भी उल्लेख किया है। दस्तावेज के अनुसार, पिछले वर्ष CBDT द्वारा ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने की निर्धारित तिथि को 30 सितंबर 2025 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2025 किया गया था तथा बाद में इसे 10 नवंबर 2025 तक बढ़ाया गया था।
वित्त मंत्रालय को पहले दिया था प्रतिवेदन
एमपीटीसीए ने न्यायालय का रुख करने से पहले 21 सितंबर 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री को विस्तृत प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया था। प्रतिवेदन में तत्काल समय-सीमा बढ़ाने सहित अन्य राहतों की मांग की गई थी। समुचित राहत नहीं मिलने के बाद एसोसिएशन ने न्यायालय की शरण ली है।
30 नवंबर तक समय बढ़ाने की मांग
याचिका में एसोसिएशन ने न्यायालय से टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। साथ ही, निर्धारित समय-सीमा का पालन न हो पाने की स्थिति में ब्याज, पेनल्टी और लेट फीस से राहत देने की भी मांग की गई है।
एसोसिएशन ने वैकल्पिक रूप से कम-से-कम 60 दिनों का अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग भी न्यायालय के समक्ष रखी है। साथ ही पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर करने और विभिन्न वैधानिक अनुपालनों के लिए पर्याप्त एवं व्यावहारिक समय-सीमा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
पोर्टल की तकनीकी खामियों पर भी राहत की मांग
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि जब तक आयकर पोर्टल की तकनीकी समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं, तब तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने में हुई देरी के आधार पर करदाताओं एवं पेशेवरों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। पोर्टल के काम न करने की स्थिति में वैकल्पिक माध्यम से दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति देने का अनुरोध भी किया गया है।
एमपीटीसीए पदाधिकारियों ने कहा—सदस्यों के हित सर्वोपरि
एमपीटीसीए इंदौर जोन के चेयरमैन सीए एस.एन. गोयल एवं जोन सचिव सीए शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि यह कदम बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, टैक्स कंसल्टेंट्स तथा करदाताओं को हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए उठाया गया है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सीनियर एडवोकेट सीए सुमित नेमा तथा उपाध्यक्ष सीए राजेश मेहता ने भी इस पहल का समर्थन किया है। एसोसिएशन की ओर से कहा गया है कि कर पेशेवरों और करदाताओं को व्यावहारिक एवं पर्याप्त समय उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वैधानिक अनुपालनों की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
यह याचिका अधिवक्ता आनंद सोलंकी के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। अब इस मामले की आगामी सुनवाई पर कर पेशेवरों और करदाताओं की निगाहें टिकी हैं।
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