वाणी बने वरदान’ — शासन श्री साध्वीजी कंचनप्रभाजी ने कहा— वाणी हमारे व्यक्तित्व की पहचान है।

‘वाणी बने वरदान’ — शासन श्री साध्वीजी कंचनप्रभाजी ने कहा— वाणी हमारे व्यक्तित्व की पहचान है। एक मीठा शब्द क्रोध की अग्नि का शमन कर देता है। जब-जब वाणी से किसी के सामने अहं-भरा शब्द आता है, वहीं से माहौल और परिवेश असंतुलित हो जाता है। ज़रूरी है वाणी संयम से दिशा-बोध प्राप्त करें।

शासन श्री साध्वीजी मंजुरेखाजी ने कहा— सुख प्राप्त करने का आधार है, समाज और परिवार, इन दोनों के बीच में व्यक्ति का विचार और व्यवहार होता है। चिंतनपूर्वक अगर बात कही जाती है, वह प्रेरणा बन जाती है तथा शब्दों की मूल्यवत्ता बढ़ जाती है। वाणी की मधुरता से ही व्यक्ति की पीढ़ियों को नापा जाता है।

साध्वी उदितप्रभाजी ने “वाणी संयम क्यों ज़रूरी है” पर सुंदर प्रस्तुति दी।

साध्वीजी कंचनप्रभाजी ने अक्षरों के माध्यम से जनता को मंत्रमुग्ध कर दिया। साध्वीजी मंजुरेखाजी ने भगवान पार्श्व के पूर्व जन्मों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच भी समता से मंज़िल को प्राप्त किया।

तेरापंथ महिला मंडल दक्षिण मुंबई के मंगलाचरण के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ। आज के कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे थे बॉम्बे सभा के अध्यक्ष श्रीमान सुरेंद्र कोठारीजी तथा उनकी टीम; सुंदर प्रस्तुति दी गई।

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा मुंबई से अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी, मंत्री गौतम दांगी, कोषाध्यक्ष रिंकू बाफना, बाबूलाल समदरिया, गणपतलाल डागलिया, नवरतन गन्ना, महेंद्र तातेड़, गौतम कोठारी, भंवरलाल कर्णावत, मानक धींग, दिनेश सुतरिया, नरेंद्र सिंघवी, अर्जुन चौधरी, राजेश कोठारी, सुभाष मेहता, दिनेश धाकड़, नितेश धाकड़, सुरेश डागलिया, कुलदीप बैद, गिरीश सिसोदिया, आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन से पूर्व अध्यक्ष किशनलाल डागलिया, मंत्री लक्ष्मीलाल डागलिया, कोषाध्यक्ष प्रकाश सिसोदिया, दक्षिण मुंबई सभा से अध्यक्ष देवेंद्र डागलिया, मंत्री पवन बोलिया, कोषाध्यक्ष अशोक धींग, तेयुप दक्षिण मुंबई से अध्यक्ष सुमित सुराणा, मंत्री श्रेयांस मुनोत, महिला मंडल दक्षिण मुंबई अध्यक्षा लतिका डागलिया तथा निर्मल भंसाली, पारस कछारा, आदि की विशेष उपस्थिति रहीं। यह जानकारी तेयुप दक्षिण मुंबई उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया एवं मुंबई सभा के प्रचार मंत्री नितेश धाकड़ ने दी।

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