महापर्व पर्युषण तीसरा दिन – अर्हम्
चेम्बूर में सामायिक दिवस पर विशेष कार्यक्रम

आत्मविजेता आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ठाणा-6 के पावन सान्निध्य में पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन की आराधना ‘सामायिक दिवस’ के रूप में की गई।
उपस्थित विशाल श्रावक समाज को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा – भगवान महावीर के जीव की भवांतर यात्रा में एक विशेषता है कि मरीचि के जन्म में उन्होंने तापसी दीक्षा ग्रहण की, वह भवांतर में भी संयासी के रूप में चलती रहती है। कभी तापस, कभी परिव्राजक, कभी संन्यासी। आखिर ऊर्ध्वारोहण के लिए अग्रिम जन्मों में वे महाव्रत दीक्षा लेते हैं। समता और विषमता, करुणा और क्रूरता ये ऐसे दो ध्रुव हैं जिन्हें एक साथ नहीं देख सकते। भगवान ने समता और करुणा का संदेश दिया। क्योंकि विषमता और क्रूरता चेतना को भटकाती है। समता और करुणा से आत्मा का कल्याण होता है। पर्युषण महापर्व समता की प्रतिष्ठा का पर्व है।
साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने अपने प्रभावी वक्तव्य में भगवान शांतिनाथ के आत्मविकास की यात्रा की विवेचना की। साध्वीश्री ने सोलहवें तीर्थंकर और पांचवें चक्रवर्ती भगवान शांतिनाथ की प्रेरणादायी अध्यात्मयात्रा की सारगर्भित प्रस्तुति दी।
साध्वी मुदितप्रभाजी ने सामायिक दिवस की महत्ता प्रतिपादित करते हुए सामायिक के विभिन्न बिंदुओं को विस्तार से समझाया। साध्वी कुंदनयशाजी ने सामायिक गीत का संगान किया। मुख्य प्रवचन से पूर्व ‘अभिनव सामायिक’ का उपक्रम तेयुप द्वारा संपादित हुआ। साध्वी कुंदनयशाजी ने जप-ध्यान आदि के प्रयोग करवाए।
कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के सस्वर जप से हुआ। कुर्ला तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने भगवान महावीर की स्तुति के साथ मंगलाचरण किया। मंच संचालन ममता कच्छारा ने किया। सभाध्यक्ष लक्ष्मणजी कोठारी ने अपने उद्गार प्रकट किए।






