*फास्ट फॉरवर्ड मोड पर आ खड़ा हुआ है संगीत*
*इन्टरनेट का संगीत जगत पर गहरा असर पड़ा*
*पुराने गीतों को नए अंदाज में पेश करना रिवायत बना*
*जयपुरी ब्रदर्स शाहरुख एवं वसीम जयपुरी ‘रूबरू’ कार्यक्रम में*
*इंदौर।* जयपुर घराने की चौथी पीढ़ी के गायक और सुप्रसिद्ध जयपुरी ब्रदर्स फ्यूजन म्यूजिक बैंड के शाहरुख़ जयपुरी एवं वसीम जयपुरी का मानना है कि इन्टरनेट की दुनिया का गहरा असर संगीत जगत पर भी पड़ा है। संगीत के नए दौर में युवा पीढ़ी पुराने गीतों को नए अंदाज में सुनना पसंद कर रही है।
स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के रूबरू कार्यक्रम में शाहरुख जयपुरी एवं वसीम जयपुरी ने कहा कि पुराने दौर में संगीत के लंबे आयोजनों को रसिक श्रोता जाजम पर बैठकर सुना करते थे लेकिन अब वक्त बदल गया है। संगीत के कार्यक्रम और लाइव कंसर्ट में हजारों युवा खड़े होकर म्यूजिक का आनंद लेते हैं। मनचाहे रीमिक्स और गीतों पर जमकर नाचते-झूमते हैं। उन्होंने कहा कि पुराने गीतों को नए अंदाज में पेश करना म्यूजिक डायरेक्टरों के लिए वक़्त की जरूरत बन गया है। धुरंधर जैसी फिल्मों के गीत इस बात का उदाहरण हैं।
दोनों भाइयों ने बताया कि इन्टरनेट की दुनिया ने म्यूजिक वर्ल्ड को फ़ास्ट फॉरवर्ड मोड पर ला खड़ा किया है। यंग जनरेशन पूरे गीतों को सुनने की बजाए एक मिनट की रील को देखना-सुनना पसंद कर रहे हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी म्यूजिक की श्रोता भी स्मार्ट वर्जन में ढल रहे हैं। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि सुनने वालों ने भी अपनी पसंद के मुताबिक कैटेगरी तय कर ली है। कोई क्लासिकल म्यूजिक सुन रहा है तो कोई ग़ज़ल। कोई भजन पसंद कर रहा है तो कोई सूफी संगीत। जहाँ भी अच्छा संगीत हो रहा है वहां श्रोता जरूर पहुँच रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संगीत क्षेत्र में बढ़ते इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि एआई का दखल संगीत कलाकारों के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। एआई की वजह से असली कलाकार की काबिलियत प्रभावित हो रही है। संगीत अभ्यास और भावनाओं का नाम है जिसे किसी भी तकनीक से संपूर्ण नहीं किया जा सकता।
शाहरुख़ एवं वसीम जयपुरी ने बताया कि उनके कई गीत लोकप्रिय हुए हैं और उनका फ्यूजन म्यूजिक बैंड देश-दुनिया में जाना जा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में कैलाश खेर के ओ री सखी मंगल गाओ, नुसरत फ़तेह अली खां के पिया रे पिया रे, छाप तिलक और अमीर खुसरों के गीतों का कवर वर्जन जारी करेंगे।
उन्होंने इंदौर घराने की संगीत परम्परा को सलाम करते हुए बताया कि उनके परदादा उस्ताद सिकंदर खां साहब जयपुर दरबार के राजगायक रहे हैं। आज भी जयपुर महल में उनका चित्र सुशोभित है। उनके दादा अजीज़ खां साहब देश के जाने-माने तबला नबाज रहे हैं। हम हर साल उनकी बरसी पर फ़रवरी माह में उदयपुर में गायन-वादन और ग़ज़ल की महफ़िल आयोजित करते हैं। उनके पिता उस्ताद राशिद अहमद जयपुरी जाने-माने संगीतकार हैं और उनके चाचा भी संगीत से जुड़े हैं।
प्रारंभ में स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, अभिषेक बड़जात्या, पंकज क्षीरसागर, समीर खान, राजेन्द्र सिंह सिकरवार, संजय मेहता, सुनील जैन एवं अन्नू शर्मा ने दोनों कलाकारों का स्वागत किया एवं स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. का प्रकाशन भेंट किया। उन्होंने राजस्थानी पारंपरिक बंदिश में कुछ सूफी कलाम और शेर पेश किए।
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