सवा करोड़ की बोली से लेकर भोजन की थाली तक धर्म कहाँ रह गया?

*सवा करोड़ की बोली से लेकर भोजन की थाली तक धर्म कहाँ रह गया?*

समाज में धर्म का अर्थ केवल मंदिर में खड़े होकर बड़ी-बड़ी बोलियां लगाना नहीं है। धर्म तो व्यवहार में दिखाई देता है विशेषकर तब, जब सामने वाला व्यक्ति आपसे कमजोर हो, असहमत हो या किसी आयोजन में आपका लाभार्थी न होकर कोई दूसरा भामाशाह हो।

आजकल समाज में एक विचित्र दृश्य देखने को मिलता है। कोई व्यक्ति सोसायटी के गुरु मंदिर में खड़ा होकर सवा करोड़ की बोली लगाता है तो समाज उसे धर्मनिष्ठ, दानवीर और बड़ा भामाशाह मानकर तालियां बजाता है। लेकिन वही व्यक्ति अपने ही संप्रदाय के किसी आयोजन में, जहां स्वामी वात्सल्य हो उसका लाभार्थी कोई दूसरा भामाशाह हो, किसी गणमान्य व्यक्ति का सार्वजनिक अपमान कर दे और यहां तक कि उसे भोजन की थाली से उठ जाने के लिए कह दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है आखिर यह कौन-सा धर्माचार है?

*क्या धर्म की बोली मंदिर में लगती है और संस्कार भोजन की थाली के बाहर छोड़ दिए जाते हैं?*

सवा करोड़ की बोली लगाना आर्थिक सामर्थ्य का प्रमाण हो सकता है, लेकिन किसी सम्मानित व्यक्ति को सम्मान देना संस्कार का प्रमाण है। समाज में प्रतिष्ठा केवल दान की रकम से नहीं बनती, व्यवहार से बनती है।

विडंबना यह है कि कुछ लोगों के लिए धार्मिक आयोजन भी मान-सम्मान, पद, प्रतिष्ठा और अपने प्रभाव का मंच बनते जा रहे हैं। जहां अपना नाम हो वहां विनम्रता, और जहां किसी दूसरे का नाम हो वहां अहंकार ऐसे दोहरे मापदंड आखिर धर्म की किस परिभाषा में आते हैं?

किसी व्यक्ति की सामाजिक हैसियत उसके द्वारा लगाई गई सबसे बड़ी बोली से नहीं, बल्कि उसके द्वारा किए गए सबसे छोटे व्यवहार से तय होती है। किसी को भोजन की थाली से उठाना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि उस संस्कार का भी अपमान है जिसकी बातें हम मंचों से करते हैं।

समाज को अब यह तय करना होगा कि उसे बोली लगाने वाले बड़े लोग चाहिए या व्यवहार निभाने वाले बड़े लोग।

क्योंकि करोड़ों की बोली से मंदिर की शोभा बढ़ सकती है, लेकिन एक अपमानजनक व्यवहार पूरे समाज के सामने व्यक्ति के संस्कारों की कीमत जरूर बता देता है।

धर्म के मंच पर “धन ” का प्रदर्शन आसान है,
धर्म को अपने व्यवहार में उतारना ही असली परीक्षा है।

और संघ समाज की अदालत में फैसला भी आखिर यही होता है
दान कितना दिया, यह बाद में याद रहता है; इंसान ने इंसान के साथ कैसा व्यवहार किया, यह ज्यादा समय तक याद रहता है।

4087 views