*राजबाड़ा से आंखों देखा हाल : रिमूव्हल दल सड़क पर, फिर भी फुटपाथ कब्जों का बाजार बेखौफ*
*दिनांक : 23 अगस्त 2026 | वार : रविवार | स्थान : राजबाड़ा, इंदौर*
इंदौर। रविवार को राजबाड़ा से लेकर आसपास के हेरिटेज बाजारों तक जो नजारा दिखाई दिया, उसने स्मार्ट सिटी और हेरिटेज एरिया की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए। मौके पर नगर निगम के सहायक रिमूव्हल अधिकारी विनीत तिवारी, राजबाड़ा रिमूव्हल प्रभारी एवं सुपरवाइजर शुभम गर्दे सहित करीब 20 से अधिक कर्मचारी मौजूद थे। लेकिन दूसरी ओर सड़क और फुटपाथ पर कब्जा जमाकर कारोबार करने वालों की भीड़ अपने पूरे तेवर में नजर आई।
सड़क पर खरीदारी करने वाली महिलाओं की भीड़, फुटपाथ कारोबारियों के हाथों में नोटों की गड्डियां और साथ में UPI भुगतान के पोस्टर यह दृश्य देखकर सहज ही सवाल उठता है कि जिस क्षेत्र को नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और हेरिटेज एरिया का दर्जा दिया है, वहां सड़क और फुटपाथ पर कारोबार का यह स्वरूप आखिर किस व्यवस्था का हिस्सा है?
*गोपाल स्टूडियो से अटाला बाजार तक फुटपाथ का बाजार*
राजबाड़ा से आगे गोपाल स्टूडियो से अटाला बाजार की ओर बढ़ते ही स्थिति और स्पष्ट दिखाई देती है। सड़क किनारे बड़ी संख्या में फुटपाथ कारोबारी कारोबार करते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस पूरे हिस्से में 500 से अधिक फुटपाथ कारोबारियों की मौजूदगी का दावा किया जाता है।
इसके बाद निहालपुरा की ओर बढ़ने पर कई दुकानदारों का सामान दुकान की निर्धारित सीमा से काफी आगे तक सड़क की ओर फैला दिखाई देता है। कहीं-कहीं करीब 15 फीट तक दुकानें आगे बढ़ी हुई नजर आती हैं। अंदरूनी हिस्सों में भी दुकानों और अस्थायी कारोबार की भरमार दिखाई देती है।
*इमामबाड़ा से जबरेश्वर महादेव मंदिर तक भी यही तस्वीर*
इमामबाड़ा से जबरेश्वर महादेव मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर भी फुटपाथ और सड़क पर अनियंत्रित कब्जों का सिलसिला दिखाई देता है। इसके आगे खजुरी बाजार, शिव विलास पैलेस, सराफा मार्ग और पीपली बाजार तक जगह-जगह सड़क और फुटपाथ पर कारोबार दिखाई देता है।
ऐसे में सवाल यह नहीं है कि फुटपाथ कारोबारी रोजी-रोटी क्यों कमा रहे हैं। सवाल यह है कि स्मार्ट सिटी और हेरिटेज क्षेत्र की सड़कें और फुटपाथ आखिर किसके लिए हैं?
*रिमूव्हल दल मौके पर, कार्रवाई फिर भी सवालों में*
आंखों देखे इस पूरे दृश्य के दौरान मौके पर मौजूद रिमूव्हल दल से जब पूछा गया कि “यहां क्या हो रहा है? नगर निगम का रिमूव्हल दल क्या कर रहा है?” तो जवाब मिला “हम कुछ नहीं कर सकते हैं।”
*यही जवाब सबसे बड़ा सवाल बन गया।*
यदि रिमूव्हल दल मौके पर मौजूद है, कर्मचारी तैनात हैं और सड़क-फुटपाथ पर कब्जे दिखाई दे रहे हैं, तो फिर कार्रवाई कौन करेगा? और यदि कार्रवाई करना रिमूव्हल दल के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, तो फिर इस व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है?
*करदाता दुकानदार बनाम सड़क पर कारोबार*
एक तरफ वर्षों से दुकान का किराया, नगर निगम के कर, बिजली, लाइसेंस और अन्य खर्च वहन करने वाले दुकानदार हैं। दूसरी तरफ सड़क और फुटपाथ पर कारोबार करने वालों की बढ़ती संख्या है। रविवार को राजबाड़ा का दृश्य इसी असमानता को सामने लाता नजर आया।
स्मार्ट सिटी का मतलब केवल सुंदर इमारतें, लाइटिंग और हेरिटेज बोर्ड नहीं हो सकता। स्मार्ट सिटी की असली पहचान व्यवस्थित सड़क, साफ फुटपाथ, सुचारु यातायात और नियमों का समान रूप से पालन होना भी है।
राजबाड़ा और आसपास के बाजारों का यह आंखों देखा हाल नगर निगम के सामने एक सीधा सवाल छोड़ता है—रिमूव्हल दल सड़क पर है, फिर भी सड़क किसकी है?
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