मोबाइल और कम उम्र के रिलेशनशिप ने छीनी पढ़ाई की एकाग्रता, करियर पर पड़ रहा असर* ✒️ *अक्षय जैन*

*मोबाइल और कम उम्र के रिलेशनशिप ने छीनी पढ़ाई की एकाग्रता, करियर पर पड़ रहा असर*

✒️ *अक्षय जैन*

नई पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के आकर्षण के बीच स्वयं को संतुलित रखना भी है। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने सुविधाएँ तो बढ़ाई हैं, लेकिन इनके दुष्प्रभाव भी तेजी से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में रिलेशनशिप और मोबाइल का अनियंत्रित उपयोग विद्यार्थियों के मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है।
किशोरावस्था को भविष्य निर्माण की उम्र माना जाता है। यही वह समय होता है जब विद्यार्थी अपने लक्ष्य तय करते हैं और जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। लेकिन वर्तमान में बड़ी संख्या में किशोर सोशल मीडिया, ऑनलाइन चैटिंग और भावनात्मक रिश्तों में उलझकर पढ़ाई से दूर होते जा रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी एकाग्रता, आत्मविश्वास और परीक्षा परिणामों पर दिखाई देने लगा है।
आज बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छोटे शहरों से महानगरों और कोचिंग हब में भेज रहे हैं। वहाँ उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ एक ऐसी शहरी जीवनशैली और सोशल मीडिया से प्रभावित संस्कृति का भी सामना करना पड़ता है, जिसमें दिखावा, ग्लैमर और महंगी जीवनशैली का आकर्षण अधिक दिखाई देता है। हर विद्यार्थी इस प्रभाव में नहीं आता, लेकिन कुछ किशोर अपनी वास्तविक परिस्थितियों और सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक के बीच तुलना करने लगते हैं। ऐसे में कुछ युवा अपने शौक और लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए गलत संगत या अनुचित तरीकों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। यही वह मोड़ है जहाँ परिवार, शिक्षकों और समाज की सतर्कता तथा निरंतर संवाद अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल समस्या नहीं, उसका गलत उपयोग समस्या है। यदि विद्यार्थी मोबाइल का उपयोग ऑनलाइन अध्ययन, नई तकनीक सीखने, भाषा ज्ञान बढ़ाने और रचनात्मक गतिविधियों के लिए करें तो यही उपकरण उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकता है। वहीं घंटों रील्स देखना, गेम खेलना और बिना उद्देश्य सोशल मीडिया पर समय बिताना समय और प्रतिभा दोनों की बर्बादी है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार कम उम्र में बनने वाले अधिकांश रिलेशनशिप भावनात्मक आवेग पर आधारित होते हैं। ऐसे रिश्तों में असफलता कई बार तनाव, अवसाद, पढ़ाई से दूरी और आत्मग्लानि जैसी समस्याओं को जन्म देती है। इसलिए किशोरों को पहले अपनी शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और करियर को प्राथमिकता देनी चाहिए।
अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका भी इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों पर केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय उनसे खुलकर संवाद करना, उनकी मित्र मंडली, ऑनलाइन गतिविधियों और मानसिक स्थिति पर संवेदनशील दृष्टि रखना अधिक प्रभावी उपाय है। बच्चों को यह विश्वास दिलाना आवश्यक है कि किसी भी समस्या में परिवार उनका सबसे बड़ा सहारा है। परिवार और विद्यालय का सहयोग ही युवाओं को डिजिटल युग की चुनौतियों से सुरक्षित निकाल सकता है।
आज का समय करियर बनाने का है, करियर बिगाड़ने का नहीं। कम उम्र का आकर्षण कुछ समय का हो सकता है, लेकिन अच्छी शिक्षा, मजबूत व्यक्तित्व और सफल करियर जीवनभर सम्मान और आत्मविश्वास देते हैं। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे मोबाइल को ज्ञान का माध्यम बनाएं, समय का नहीं; और अपनी ऊर्जा रिश्तों की जल्दबाजी में नहीं, बल्कि अपने सपनों को साकार करने में लगाएं। यही निर्णय उनके उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव बनेगा।

402 views