स्वाध्याय से मिलता है सुख, शांति और सकारात्मकता : महासती डॉ. कुमुदलताजी म.सा.

स्वाध्याय से मिलता है सुख, शांति और सकारात्मकता : महासती डॉ. कुमुदलताजी म.सा.

इंदौर। दिवाकर दरबार, एयरपोर्ट रोड स्थित नरसिंह वाटिका में चातुर्मास के दौरान आयोजित धर्मसभा में अनुष्ठान आराधिका महासती डॉ. कुमुदलताजी म.सा. एवं साध्वी पद्मकीर्तीजी म.सा. ने आगम, धर्म और अहिंसा पर प्रेरक प्रवचन दिए।

साध्वी पद्मकीर्तीजी म.सा. ने कहा कि सुखविपाक सूत्र का स्वाध्याय जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता का संचार करता है। वास्तविक सुख केवल धर्म से जुड़ने से मिलता है। उन्होंने भगवान महावीर का संदेश देते हुए कहा, “दुःख में घबराना नहीं और सुख में इतराना नहीं।”

महासती डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने कहा कि संतों के लिए आगम सबसे बड़ी दौलत हैं। आगम जीवन को सही दिशा देने वाले रक्षक हैं। उन्होंने वास्तु शांति का वास्तविक अर्थ बताते हुए कहा कि भवन निर्माण के दौरान जिन सूक्ष्म जीवों की हिंसा होती है, उनसे क्षमा याचना और आत्मशुद्धि ही वास्तु शांति का मूल उद्देश्य है।

इस अवसर पर पार्श्व पद्मावती 16 शुक्रवार एकासना आराधना का शुभारंभ हुआ, जिसमें 800 से अधिक श्रद्धालुओं ने एकासना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के लाभार्थी श्री वीरेंद्र-रेखा जैन, श्री विवेक-शारदा जैन एवं स्वर्णिम-हार्मनी जैन परिवार, इंदौर रहे। संचालन जिनेश्वर जैन ने किया।

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