*विवाह योग्य जीवनसाथी मिलना क्यों हुआ कठिन? महिला संघ की विचार गोष्ठी में निकले समाधान*
अ भा श्वेताम्बर जैन महिला संघ केंद्रीय इकाई द्वारा वर्तमान समय में विवाह योग्य उम्मीदवार पाना मुश्किल हो गया है । इस पर विचार गोष्ठी का आयोजन दादावाडी रामबाग पर किया गया।मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए वीरेंद्र कुमार जैन ने कहा की देर से विवाह की प्रवृत्ति उच्च शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देने के कारण विवाह की आयु बढ़ गई है।जीवनसाथी में शिक्षा, आय, व्यवसाय, रूप-रंग, कद, परिवार, शहर, जीवनशैली आदि को लेकर अपेक्षाएँ बहुत बढ़ गई हैं।
श्रीमती रेखा जैन ने कहा लड़कियों का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना यह सकारात्मक बदलाव है, लेकिन इससे जीवनसाथी के चयन में समानता और अनुकूलता की अपेक्षाएँ भी बढ़ी हैं।
स्नेह कटारिया कहा कि अलग-अलग शहरों और देशों में रहने के कारण संपर्क और मुलाकातें कम हो जाती हैं।
विजया जैन बोली आधुनिक और पारंपरिक सोच के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है।
सुशीला बेताला ने अपनी बात रखी कि तलाक और असफल विवाह का डर से लोग निर्णय लेने में अधिक सावधानी बरतते हैं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है।
पूजा जैन ने बतलाया प्रारंभिक बातचीत में ही गलतफहमियाँ या अपेक्षाओं का स्पष्ट आदान-प्रदान न होने से अच्छे रिश्ते भी आगे नहीं बढ़ पाते।
रेखा नानावटी आव्हान किया अपेक्षाओं को यथार्थवादी बनाएं। आवश्यक और वांछनीय गुणों में अंतर करें।
संगीता पोरवाल ने सुझाव दिया खोज का दायरा बढ़ाएँ। यदि संभव हो तो अन्य शहरों और व्यापक सामाजिक दायरे में भी देखें।
सुधा जैन ने विश्वसनीय मैट्रिमोनियल प्लेटफ़ॉर्म और महिला संघ जैसे आनलाइन मेट्रिमोनियल मीट में सहभागिता बढ़ावे । इस कार्यक्रम में इंदौर के 77 महिला संघ के पदाधिकारियों ने भाग लिया।अंत में पूजा जैन ने आभार व्यक्त किया।






