श्री शान्तिनाथ अनुष्ठान से शान्ति, अहिंसा एवं करुणा की प्रेरणा

*श्री शान्तिनाथ अनुष्ठान से शान्ति, अहिंसा एवं करुणा की प्रेरणा*

जैन समाज द्वारा किए जाने वाले श्री शांतिनाथ अनुष्ठान – विधान में शांति, अहिंसा, करुणा और अनुशासन के लिए 16वें तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ की आराधना की जाती है क्योंकि उन्होंने 15 तीर्थंकरों के बाद मोक्षमार्ग को अपने काल में पुनः प्रशस्त किया था, उनकी पूजा करने से शांति अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है, श्री भरत जैन शास्त्री द्वारा छावनी स्थित श्री अनंतनाथ जिनालय के 113 वर्ष पूर्ण होने पर दो दिवसीय स्थापना महोत्सव में विचार व्यक्त किये, मीडिया प्रभारी एम के जैन ज्योतिषाचार्य एवं मंत्री मनीष जैन वेद ने बताया कि 21 फरवरी को शाही लवाजमे के साथ कलश शोभायात्रा विभिन्न मार्गो से पंचायती जैन मंदिर तक निकाली गई जिसमें समाजजन इन्द्र – इंद्राणी बनकर सम्मिलित हुए, जिनालय पर ध्वजारोहण राजेंद्र मंजुला गोधा एवं निधि डिवेश डोसी द्वारा किया गया 22 फरवरी को एडवोकेट वीरकुमार जैन एवं श्री शांतिलाल – सुनीलकुमार बिलाला परिवार द्वारा शिखर पर स्वर्ण कलश चढ़ाया जाएगा, श्री भरत – कुसुम मोदी द्वारा संत सदन का शिलान्यास एवं नवश्रंगारित औषद्यालय का उद्घाटन किया जाएगा, इस अवसर पर अनीस सोनी, प्रकाश बड़जात्या, देवेंद्र सेठी, जितेंद्र बाकलीवाल सुनील चांदवाण, सुशील पाटनी, देव डोसी, अशोक सोनी आदि सैकड़ो समाज जन उपस्थित थे

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