हिंदू समाज की एकता पर जोर, संघ सत्ता का अभिलाषी नहीं : मोहन भागवत*
मोहन भागवत ने शुक्रवार को खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में हिंदू समाज की एकता और बंधुत्व की भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जातिवाद, भेदभाव और असमानता को केवल आपसी बंधुत्व से ही समाप्त किया जा सकता है। संघ का उद्देश्य अपना नहीं, बल्कि देश का नाम बड़ा करना है। मेरठ के शताब्दीनगर स्थित माधवकुंज में लगभग 950 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ सत्ता का अभिलाषी नहीं है, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना उसका मूल उद्देश्य है। हिंदू शब्द को उन्होंने विशेषण बताते हुए कहा कि विविधता में एकता ही भारतीय संस्कृति की पहचान है। संघ से जुड़ने के लिए उन्होंने पांच मंत्र भी बताए और कहा कि कोई भी व्यक्ति निस्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य करे, वही सच्चा स्वयंसेवक है। शनिवार को वे विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख जनों से भी संवाद करेंगे।






