विकास के दावों के बीच दम तोड़ता ढांचा*
इंदौर आज देशभर में स्वच्छता और औद्योगिक सक्रियता के लिए पहचाना जाता है। निवेश, व्यापार, नए प्रोजेक्ट और विस्तार हर मोर्चे पर शहर आगे बढ़ता दिखाई देता है। लेकिन विकास की इस चमकदार सतह के नीचे एक कठोर सच्चाई लगातार आकार ले रही है । शहर का आधारभूत ढांचा उसकी रफ्तार का साथ नहीं दे पा रहा।
जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में वाहन वृद्धि कहीं अधिक तेज़ रही है। दोपहिया वाहनों की संख्या जनसंख्या से आगे निकल चुकी है, जबकि चारपहिया और सार्वजनिक परिवहन के त्रिपहिया वाहन भी बराबरी की दौड़ में हैं। हर घर में एक से अधिक वाहन अब सामान्य स्थिति है। परंतु प्रश्न यह है कि इन वाहनों के लिए नियोजित स्थान कहाँ है?
शहर के प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में पार्किंग व्यवस्था लगभग प्रतीकात्मक रह गई है। दुकानों की संख्या बढ़ी, कॉम्प्लेक्स खड़े हुए, व्यावसायिक गतिविधियां विस्तारित हुईं ,पर स्थायी पार्किंग के समाधान समान अनुपात में विकसित नहीं हुए। परिणामस्वरूप सड़कें ही पार्किंग स्थल बन गईं और फुटपाथों का अस्तित्व समाप्तप्राय हो गया। यातायात जाम अब अपवाद नहीं, दैनिक दिनचर्या बन चुका है।
वास्तविकता यह है कि शहरी नियोजन में दीर्घकालिक दृष्टि का अभाव दिखाई देता है। नए प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति देते समय पार्किंग और यातायात प्रबंधन की सख्ती कागज़ों तक सीमित रह जाती है। पुराने बाजारों के पुनर्विकास की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। प्रशासन की कार्रवाई अक्सर दंडात्मक रूप में दिखाई देती है, जबकि मूल समस्या संरचनात्मक है।
एक औद्योगिक अर्थव्यवस्था वाले शहर से अपेक्षा होती है कि वह आधारभूत संरचना में भी समान गति से निवेश करे। केवल आर्थिक गतिविधियों का विस्तार विकास नहीं कहलाता। विकास तब सार्थक होता है जब नागरिकों को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम जीवन-परिस्थितियाँ उपलब्ध हों।
आज आवश्यकता है व्यापक और साहसिक नीति की
मल्टीलेवल पार्किंग को प्राथमिकता,
सार्वजनिक परिवहन को सशक्त और विश्वसनीय बनाना,
व्यावसायिक क्षेत्रों का वैज्ञानिक पुनर्संरचना,
और वाहन पंजीयन व शहरी क्षमता के बीच संतुलन स्थापित करना।
इंदौर के सामने विकल्प स्पष्ट है या तो वह अनियोजित विस्तार के बोझ तले जाम और अव्यवस्था में उलझता रहेगा, या फिर दूरदर्शी शहरी योजना के माध्यम से अपनी विकासगाथा को स्थायी स्वरूप देगा।
विकास के दावों से आगे बढ़कर अब ज़मीन पर ठोस संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है। क्योंकि शहर केवल बढ़ने से महान नहीं होता, बल्कि सुव्यवस्थित होने से महान बनता है।






