*तीन रिमूवल टीमें, 50 से ज्यादा कर्मचारी… फिर भी राजबाड़ा में अतिक्रमण कायम*
इंदौर। शहर के ऐतिहासिक क्षेत्र राजबाड़ा से कपड़ा मार्केट के बीच सड़क और फुटपाथ पर लगने वाली रेहड़ी-पटरी और अस्थायी दुकानों का सिलसिला थम नहीं रहा। नगर निगम ने यहां अतिक्रमण हटाने के लिए तीन रिमूवल टीमें तैनात कर रखी हैं। समयबद्ध प्रत्येक टीम में 18 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी बताई जाती है। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध कब्जे लगातार नजर आ रहे हैं। हालांकि विगत 4दिनों से यातायात पुलिस के आला अफसरों की आवाजाही सख्ती के चलते स्थिति बदली बदली है ।
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कार्रवाई के बाद भी लौट आते हैं कब्जे
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि निगम की टीम समय-समय पर कार्रवाई करती है, लेकिन यह असर स्थायी नहीं होता। टीम के जाते ही कुछ ही घंटों में सड़क और फुटपाथ फिर से घिर जाते हैं। खासकर राजबाड़ा से कपड़ा मार्केट तक सभी बाजारों का हिस्सा शाम के समय सबसे ज्यादा प्रभावित रहता है।
*जवाबदेही पर उठे सवाल*
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि ड्यूटी पर तैनाती के बावजूद सड़क कब्जे दिख रहे हैं या लगातार शिकायतें मिल रही हैं, तो संबंधित रिमूवल दल की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। सवाल यह भी है कि बार-बार एक ही स्थान पर अतिक्रमण होने पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
सबसे ज्यादा दबाव इसी हिस्से में
राजबाड़ा क्षेत्र शहर का व्यस्ततम बाजार है। पैदल खरीदारों की भीड़, सीमित सड़क चौड़ाई और फुटफॉल के कारण यहां रेहड़ी-पटरी लगाने वालों की संख्या बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप पैदल चलना मुश्किल होता है और यातायात बाधित रहता है।
निगम का दावा
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि नियमित कार्रवाई की जा रही है और दोबारा कब्जा करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी। हालांकि जमीनी स्थिति से स्पष्ट है कि समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
फिलहाल प्रश्न यही है कि तीन रिमूवल टीमों की अपने समय की तैनाती के बाद भी यदि अतिक्रमण नहीं रुक रहा, तो व्यवस्था में कमी कहां है कार्रवाई में, निगरानी में या जवाबदेही में?






