*राजबाड़ा क्षेत्र में अव्यवस्था से आमजन त्रस्त

*राजबाड़ा क्षेत्र में अव्यवस्था से आमजन त्रस्त*

*पार्किंग, अतिक्रमण और प्रशासनिक रवैये पर उठे सवाल*

इंदौर का ऐतिहासिक राजबाड़ा क्षेत्र, जो शहर की पहचान और प्रमुख पर्यटन स्थल है, आज गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार होता जा रहा है। यह क्षेत्र न केवल पर्यटकों का आकर्षण है, बल्कि शहर का सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र भी है, जहां प्रतिदिन हजारों महिलाएं खरीदारी के लिए पहुंचती हैं।

राजबाड़ा से सुभाष चौक स्थित कार पार्किंग की दूरी मात्र 200 मीटर है, लेकिन यातायात व्यवस्था ऐसी बना दी गई है कि वाहन चालकों को पार्किंग तक पहुंचने के लिए डेढ़ किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इस असुविधा के कारण लोग पार्किंग का उपयोग करने से कतराने लगे हैं, जिससे क्षेत्र में अव्यवस्थित पार्किंग और जाम की स्थिति बनी रहती है।

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब शिवविलास पैलेस और राजबाड़ा के पीछे के हिस्सों में फैले अतिक्रमणों पर नजर जाती है। सड़कों पर 15 मीटर तक कब्जा होने से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। संकरी गलियों में राहगीर, महिलाएं और बुजुर्ग स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि प्रशासन व्यवस्था सुधारने के बजाय केवल मार्ग एकांकी कर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कागजों तक सीमित है। प्रतिदिन नगर निगम का रिमूवल विभाग मुनादी कर औपचारिकता पूरी कर लेता है, लेकिन स्थायी समाधान कहीं नजर नहीं आता।

सूत्रों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने वालों और दुकानदारों के बीच गठजोड़ किसी से छुपा नहीं है। पूरे राजबाड़ा क्षेत्र के आसपास 400 से अधिक कब्जाधारक खुलेआम पैर पसारे हुए हैं, जिससे क्षेत्र की गरिमा और यातायात दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

आम नागरिकों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण वे लगातार परेशान हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजबाड़ा जैसे ऐतिहासिक और व्यावसायिक क्षेत्र की स्थिति और भी बदतर हो सकती है।

अब आवश्यकता है कि प्रशासन पार्किंग की सीधी सुविधा, अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई और यातायात की व्यवहारिक योजना लागू करे, ताकि राजबाड़ा अपनी पहचान और सुविधा दोनों को बचा सके।

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