वर्ल्ड बैंक का नंबर वन कर्जदार देश बना भारत

वर्ल्ड बैंक का नंबर वन कर्जदार देश बना भारत

वर्ल्ड बैंक ने दस देशों की एक सूची जारी की है। इसमें अर्जेंटीना, तुर्की, मैक्सिको, चीन, फिलीपींस, ब्राजील, कोलंबिया, यूक्रेन, इंडोनेशिया के साथ भारत का नाम सबसे बड़े कर्जदारों में शामिल हैं। बड़ी बात यह है कि इन सभी देशों में भारत को सबसे नंबर एक की पोजीशन का भिखारी बताया गया है। भारत पर वर्ल्ड बैंक का कुल 3.28 लाख करोड़ रुपया कर्ज है।

यह लिस्ट शेयर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह जी ने एफबी पर लिखा है-

भारत वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार… 2023 के अंत तक, भारत वर्ल्ड बैंक (विशेष रूप से IBRD और IDA के माध्यम से) का सबसे बड़ा कर्जदार देश है, जिसका बकाया कर्ज लगभग 39.3 अरब डॉलर (करीब 3.28 लाख करोड़ रुपये) है।
वर्ल्ड बैंक का कर्ज कम ब्याज दर वाला (concessional loans) होता है, जो भारत की GDP का मात्र 1% से भी कम है (भारत की GDP 2025 में अनुमानित 3.7 ट्रिलियन डॉलर)। यह कर्ज सड़कें, रेल, ग्रामीण विकास और COVID-19 जैसी महामारी से निपटने के लिए इस्तेमाल होता है । 2023-24 में वर्ल्ड बैंक ने भारत को 3.3 अरब डॉलर के नए लोन दिए, जो ऊर्जा और स्वास्थ्य पर केंद्रित थे।

मुद्रास्फीति या वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि (जैसे 2022-23 में) से चुकौती महंगी हो सकती है, लेकिन भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार (600 अरब डॉलर+) से इसे संतुलित रखा है।

2014 (मई में मोदी जी ने कार्यभार सँभाला ) के समय भारत का वर्ल्ड बैंक से बकाया कर्ज लगभग 26.8 अरब डॉलर था। 2023 के अंत तक यह 39.3 अरब डॉलर हो गया, यानी करीब 12.5 अरब डॉलर (46%) की वृद्धि हुई।

वार्षिक औसत वृद्धि: लगभग 1.4 अरब डॉलर प्रति वर्ष है जो मुख्य रूप से ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं के लिए नए लोन से आई है ।

कुल बाहरी कर्ज 2014 में 457 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 647 अरब डॉलर हो गया, लेकिन वर्ल्ड बैंक का हिस्सा कुल का मात्र 6% है।

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