नई दिल्ली:
ट्रंप ने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओ पर 100% टैरिफ लगाया है हमारे यहां से लगभग 90%जेनेटिक दवाईयां अमेरिका में एक्सपोर्ट होती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक और बड़ी घोषणा करते हुए फार्मा उत्पादों यानी दवाइयों के आयात पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. यह टैरिफ 1 अक्टूबर से लागू होगा. ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय दवा निर्माताओं पर पड़ेगा. आपको बता दें कि भारतीय दवा निर्माताओं के लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है.
भारत दवाइयों का सबसे बड़ा सप्लायर, ट्रंप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे?
ट्रंप के नए टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारतीय उत्पादों पर पड़ेगा. ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि भारत अमेरिका को दवाओं के सबसे बड़े सप्लायर्स में से एक है. 2024 में भारत का कुल फार्मा निर्यात 12.72 बिलियन डॉलर था. इनमें से 8.7 अरब डॉलर की सप्लाई अमेरिका को गई थी. जबकि वहां से केवल 80 करोड़ डॉलर के फार्मा प्रोडक्ट्स भारत आते हैं. अभी तक भारत अमेरिका से आने वाली इन दवाइयों पर 10.91 फीसदी टैरिफ लगाता है. वहीं अमेरिका भारतीय दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगा रहा है.
2 अप्रैल 2025 के टैरिफ ऐलान में ट्रंप ने फॉर्मा सेक्टर को बाहर रखा था और इस पर कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया था. लेकिन अब इन पर 100 फीसदी टैरिफ लगने से ये और महंगी होंगी.
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में अमेरिका में सामान्य इस्तेमाल वाली 10 में से 4 दवाई भारतीय कंपनियों से आई थी. वास्तव में, भारतीय कंपनियों की दवाओं की वजह से ही 2022 में अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को 219 अरब डॉलर और 2013 से 2022 तक कुल 1.3 ट्रिलियन डॉलर की बचत की. मतलब अमेरिका हमारी जेनेरिक दवाई खाकर पैसा बचा रहा है. अगले पांच सालों में भारतीय कंपनियों की जेनेरिक दवाओं से अमेरिका को अतिरिक्त 1.3 ट्रिलियन डॉलर की बचत होने की उम्मीद है.
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