श्वेताम्बर मालवा महासंघ का 14वां अधिवेशन एवं श्री संघ मिलन समारोह का हुआ उद्घाटन

*श्वेताम्बर मालवा महासंघ का 14वां अधिवेशन एवं श्री संघ मिलन समारोह का हुआ उद्घाटन

जिन शासन की गौरवगाथा, जिनागम की मधुर महिमा और जिन बिंब की पावन प्रेरणा के संग
श्वेताम्बर मालवा महासंघ का 14वां अधिवेशन एवं श्री संघ मिलन समारोह का हुआ उद्घाटन
आचार्य देव श्रीमद विश्वरत्न सागर जी महाराज साहब के मंगलपाठ से धर्ममय वातावरण में प्रारंभ हुआ।
साधु-साध्वी महाराज साहबों की पावन उपस्थिति ने इस आयोजन को आध्यात्मिक आलोक से आलोकित कर दिया।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया।
मंचासीन अतिथियों में तुलसी सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायिका मालिनी गोड़, विधायक गोलु शुक्ला, विधायक रमेश मैदोला, पूर्व महापौर मधु वर्मा, नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा, भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश धाकड़ नागदा , इंदौर चातुर्मास समिति अध्यक्ष पुण्यपाल सुराणा, महासंघ अध्यक्ष दिलसुखराज कटारिया एवं संचालक टिनु जैन,अभय चोपड़ा, राजेश मानव सहित पत्रकार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक दीपक दुग्गड एवं समाज के गणमान्य जन उपस्थित रहे।
नगर-नगर, गांव-गांव से आये असंख्य संघों के श्रद्धालुओं ने इस अधिवेशन को ऐतिहासिक बना दिया।
आचार्य विश्वरत्न सागर जी महाराज का प्रेरणादायी संदेश
अपने उद्बोधन में आचार्य श्री ने भाव विभोर कर देने वाले शब्दों में कहा –
“आज हमें हर्ष है कि हमारे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री किसी राजसी आसन के प्रतिनिधि बनकर नहीं, बल्कि एक विनम्र भक्त के रूप में हमारे आशीर्वाद हेतु उपस्थित हैं। यह सहजता, यह भक्ति उनकी महानता का प्रमाण है। जब समूचे देश में अलग-अलग समस्याएं विद्यमान हैं, तब मध्यप्रदेश का प्रगतिशील स्वरूप उनके नेतृत्व का प्रत्यक्ष साक्षी है।
जैन संत कभी अनावश्यक प्रशंसा नहीं करता, परंतु यह हमारा गौरव है कि मोहन जी वर्षों से हमारे विभिन्न कार्यों में सहभागी बनते रहे हैं।
एकता और संगठन ही शक्ति है – राम के साथ भाई था इसलिए विजय मिली, पर रावण के पास भाई का साथ नहीं था, इसलिए पराजय हुई।”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का भावपूर्ण उद्बोधन
मुख्यमंत्री जी ने गुरु चरणों में वंदन कर कहा –
“जहां हमारी सोच का अंत होता है, वहां संत विराजमान होते हैं। संत हमें अहिंसा, करुणा और अरिहंत मार्ग की ओर ले जाते हैं। अहिंसा परमो धर्म का मार्ग ही जीवन का सच्चा अलंकार है।
जैन समाज के साथ जुड़े रहकर हम ‘जियो और जीने दो’ का संदेश आत्मसात करते हैं। गौशालाओं को अनुदान से पोषित करना, कुपोषण का अंत करना, दूध-दही-घी का संवर्धन करना और किसानों की आय बढ़ाना – यही सरकार की प्राथमिकता है।
हम स्वदेशी अपनाकर आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर हैं।
जिनिंग मशीन और कपास उद्योग को पुनर्जीवित कर 1 लाख युवाओं को रोजगार और 6 लाख किसानों को लाभ होगा।
जैन समाज के तप, त्याग और सिद्धांतों को नमन करते हुए मैं प्रणाम करता हूं कि आप सबके मार्गदर्शन से मध्यप्रदेश नित नई ऊँचाइयों को छुएगा।”

पूरे समारोह में धर्म, संस्कृति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला।
जहां जिन शासन की जयघोष गूंजा, वहीं सामाजिक एकता और प्रगति का संकल्प भी दृढ़ हुआ।
यह अधिवेशन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आलोक, सामाजिक शक्ति और प्रगति का प्रस्थान बिंदु सिद्ध हो रहा है

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