जरूरी जानकारी नहीं दी तो नामांकन रद्द तय? सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का बड़ा बयान*
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने कहा कि उम्मीदवार द्वारा आवश्यक जानकारी नहीं देने पर हलफनामा अधूरा माना जाता है और यह नामांकन खारिज करने का आधार बन सकता है। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत में कहा कि फॉर्म-26 में जरूरी जानकारियों का खुलासा न करने से हलफनामा अधूरा रह जाता है। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव संबंधी विवादों का निपटारा चुनाव न्यायाधिकरण के माध्यम से किया जाना चाहिए। वहीं, प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक वैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि नामांकन रद्द होने से जुड़े विवादों का समाधान चुनाव याचिका के जरिए ही किया जा सकता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और अदालत के अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।






