जल गंगा संवर्धन अभियान की अभूतपूर्व उपलब्धियों की प्रदर्शनी, शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री

*मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में प्रदर्शित होगी*

*जल गंगा संवर्धन अभियान की अभूतपूर्व उपलब्धियों की प्रदर्शनी, शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री*

भोपाल।जल गंगा संवर्धन ने राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान स्थापित की है। यह अभियान अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन गया है। इस अभियान की अभूतपूर्व उपलब्धियों को प्रदर्शनी के रूप में संयोजित किया गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है। विधानसभा सदस्यों के अवलोकन के लिए विधानसभा के सेंट्रल हॉल एवं फोर लेन मुक्ताकाशी परिसर में जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलताओं पर केन्द्रित प्रदर्शनी मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान, मध्यप्रदेश की बावडि़यॉं, जलचर- जलीय जीवन के प्राणतत्व, अमृतस्य नर्मदा, उपग्रह की नजर से प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाएँ को वीर भारत न्यास द्वारा प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रदर्शनी का शुभारंभ 28 जुलाई 2025 को दोपहर 1:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा किया जायेगा।

इस प्रदर्शनी में जनसंपर्क विभाग, म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्याेगिकी परिषद, संचालनालय पुरातत्‍व, अभिलेखागार और संग्रहालय व बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय सहयोगी संस्‍थाएँ हैंं। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि यह प्रदर्शनी नदियों के स्वास्‍थ्‍य की ओर समाज को संवेदनशील बनाने का एक सांस्कृतिक प्रयास है। नदियाँ जलधाराएँ नहीं, हमारी स्मृततियों, परंपराओं और जीवन की आधारशिला है। इसी संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने 30 मार्च से 30 जून 2025 तक 90 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया।

प्रदेशभर में चले इस अभियान में जनभागीदारी की अद्भुत मिसाल देखने का मिली। स्थानीय नागरिकों ने जल संरक्षण के प्रति अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। न्यासी सचिव ने बताया कि देश में पहली बार ही ऐसा हुआ होगा कि नदियों, जलस्रोतों व जल संरचनाओं को संरक्षित करने 2 लाख 30 हजार 740 से अधिक जलदूतों ने पंजीयन कराया। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल कर निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति करते हुए मध्यप्रदेश में 84 हजार 726 खेत तालाब, 1 लाख 4 हजार 276 कूप रिचार्ज पिट और 1283 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य कराया गया। इतना ही नहीं जल संचय करने वाले जिलों में खंडवा देशभर में नबर वन बनकर हमारे सामने है। राज्यों की श्रेणी में हमें चौथा स्थान प्राप्त हुआ है।
न्यासी सचिव ने कहा कि मध्यप्रदेश की बावडि़यॉं, जलचर- जलीय जीवन के प्राणतत्व, अमृतस्य नर्मदा, उपग्रह की नजर से प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनियाँ अपने-आप में महत्वपूर्ण है।

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