आज सुनहरे युग के लोकप्रिय और सफल फिल्मकार ” मनोज कुमार ” का जन्म दिवस है
, आपका जन्म सन १९३७ में अविभाजित भारत के ऐटबाबाद में हुआ है, जो अब पाकिस्तान में है, आपका मूल नाम हैं ” हरी किशन गिरी गोस्वामी” , १० वर्ष के थे कि देश के विभाजन में उनके परिवार को दिल्ली आकर शरणार्थी शिविर में रहना पड़ा, उनकी शिक्षा दिल्ली विश्व विद्यालय में पूरी हुई , उन्हे कहानियां लिखने का शौक था , शुरुआत में उन्होंने कई फिल्मों की कहानियां लिखी जिसका श्रेय उन्हें नहीं मिल सका , आकर्षक व्यक्तित्व के कारण उनके मित्रो ने उन्हे अभिनेता बनने की सलाह दी, वो मुम्बई आ गए, कुछ फिल्मों छोटी छोटी भूमिका मिली , तभी एक निर्माता ने उन्हे नायक के रोल का प्रस्ताव दिया जो उन्होंने अपनी मंगेतर ” शशि ” से पूछकर स्वीकार किया , आगे यही ” शशि जी ” उनकी जीवन संगिनी बनी, फिल्मों में काम करने के लिए अपना नाम रख लिया ” मनोज” , आपकी शुरुआती फिल्मे रही _ पिया मिलन की आस, कांच की गुड़िया, फैशन, रेशमी रुमाल, शादी , आदि
फिल्मकार विजय भट्ट की फिल्म ” हरियाली और रास्ता ” की जबरजस्त सफलता से वो स्टार बन गए, इसके बाद _ वो कौन थी, हिमालय की गोद में फिल्मे भी सफल रही
सन १९६५ में उन्होंने फिल्मकार ” केवल पी कश्यप ” के साथ मिलकर ” शहीद ” का निर्माण किया, फिल्म के प्रीमियर शो के समय दिल्ली में मुख्य अतिथि तत्कालीन प्रधानमंत्री ” लाल बहादुर शास्त्री जी” ने फिल्म शहीद की तारीफ की और अपने दिए हुए नारे ” जय जवान जय किसान” पर फिल्म बनाने का सुझाव दिया, मनोज कुमार जी को ये सुझाव पसंद आया, दिल्ली से मुंबई यात्रा के दौरान मनोज जी ने इस विषय पर एक कहानी लिखना शुरू कर दिया , मुंबई आ कर पुरी कहानी लिख डाली और फिल्म ” उपकार ” के निर्माण का काम शुरू कर दिया निर्देशन का काम भी स्वयं किया, फिल्म की जबरजस्त सफलता के साथ उनकी पहचान एक कामयाब निर्देशक की हो गई , दुर्योग ये रहा कि उन्हें सलाह देने वाले ” शास्त्री जी ” उनकी फिल्म।नहीं देख पाए
इसके बाद उनकी कंपनी ” विशाल पिक्चर्स ” के बेनर से _ पूरब और पश्चिम, शोर, रोटी कपड़ा और मकान, क्रांति” फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया
भारत सरकार द्वारा उन्हे सन १९९२ में पद्मश्री और २०१६ में दादा साहेब फालके पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, आपको कुछ अन्य फिल्मे है_ घर बसाके देखो, डाक्टर विद्या, गृहस्थि, सहारा, हनीमुन , चांद , मां बेटा, नकली नवाब, बेदाग , पूनम की रात , पिकनिक, सावन की घटा, पत्थर के सनम , गुमनाम , अनिता, यादगार , दो बदन, आदमी, नील कमल, मेरा नाम जोकर, पहचान, दस नंबरी, बेइमान, बलिदान, सन्यासी, आदि
आपका इसी वर्ष ४ अप्रैल को स्वर्गवास हो गया उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि, ????????????
२४ जुलाई २०२५






