प्रसिद्ध जैनाचार्य यशोवर्म सूरीश्वरजी की निश्रा में हुआ मदन हुंडिया द्वारा लिखित “माझे ठाणे” ग्रंथ का विमोचन

*मराठी भाईयों का साथ मिला तभी हम सबने विकास किया: हार्दिक हुंडिया*
मुंबई। लोग थाना नाम से डरते है लेकिन विश्व में पहला ऐसा थाना है की जहाँ लोग भारी संख्या में उपस्थित हुये। एक २७ साल के लड़के को भी शर्म आये ऐसा अद्भुत कार्य ७२ साल के मदन हुंडिया ने किया है। इनके द्वारा लिखित “माझे ठाणे” ग्रंथ का सफलतापूर्वक विमोचन के शुभ अवसर पर हार्दिक हुंडिया ने कहा कि हम मारवाड़ी गुजरातियों ने तभी राष्ट्र के महाराष्ट्र में विकास किया जब हमे महाराष्ट्रीयन भाईयों का साथ मिला। थाना वो अनमोल नगरी है जहाँ का ११ लाख साल पहले से लेकर आज तक का इतिहास ये ૨૦૦ पेज के ग्रंथ में वर्णित है। छ:ह साल की कड़ी मेहनत के बाद मदन हुंडिया ने ठाणे का अद्भुत इतिहास इस ग्रंथ में लिखा है। इसमें ठाणे के जैन अजैन सभी औलोकिक घटनाए लिखी गई है। वरिष्ठ जैन अग्रणी हार्दिक हुंडिया ने कहा की मदनलाल ने अपने ग्रंथ में थाना के इतिहास का इतिहास लिख दिया है। “माझे ठाणे” यानी कोंकण शत्रुंजय श्री थाना नगर, श्रीपाल मयना नगरी, अलकापुरी-कुबेर की नगरी श्री थाना नगर का प्राचीन इतिहास से वर्तमान के आनद दीघे तक के अनमोल पलो का विवरण इस ग्रंथ में किया गया है। इसी थाना ने महाराष्ट्र के ऐसे मुख्य मंत्री एकनाथ शिंदे दिये हैं जिन्होंने थाना का नाम देश भर में रोशन किया है।
हार्दिक हुंडिया का कहना है की प्रांतवाद के झगड़ो को छोड़कर हमे एक होकर नगर, ज़िला, राज्य और देश के विकास में लगना चाहिये । छ:ह साल की कड़ी मेहनत के बाद मदनलाल द्वारा लिखित “माझे ठाणे” ग्रन्थ का विमोचन प्रसिद्ध जैनाचार्य यशोवर्म सूरीश्वरजी महाराजा साहेब की निश्रा में वरिष्ठ समाज सेवी जैन अग्रणी हार्दिक हुंडिया, निरंजन डावखरे , निखिल बरचूड़े, संदीप लेले, बाबू नानावटी, जे के संघवी, उदय परमार जैसे कई महानुभावों की हाजरी में हुआ। प्रसिद्ध जैनाचार्य ने कहा कि ये वो मुनिसुव्रत स्वामी दादा का मंदिर है जहाँ आनंद दीघे जैसे धर्मप्रेमी भी दर्शन करने आते थे । ये पवित्र भूमि का इतिहास लिखने वाले मदन हुंडिया को उन्होंने आशीर्वाद दिया था। हार्दिक हुंडिया और मदन हुंडिया ने पहली कॉपी विमोचन करने के बाद प्रसिद्ध जैनाचार्य यशोवर्म सूरिश्वरजी महाराज साब को भेंट की। कार्यक्रम का सफल संचालन जैनम संघवी ने किया।
गौरतलब है कि मूल रूप से राजस्थान आहोर निवासी हुंडिया परिवार लगभग १४० वर्ष से ठाणे में बसा हुआ है। इस अवसर पर मदनलाल जी हुंडिया ने कहा कि माझे ठाणे ग्रंथ लिखने की प्रेरणा प. पु सा. श्री जिनांगयशाश्रीजी म. सा. (डिप्पी म. सा.) के अति आग्रह से मिली है। जिसको लिखने में करीब छ:ह साल का समय लगा है। मदनलाल हुंडिया जी की यह पहल समाज को एक नई दिशा प्रदान करेगी और आनेवाली पीढ़ी ठाणे के इतिहास से रूबरू होकर विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे, यह ग्रंथ युगों युगों तक अमर रहेगा।






