*आदीवासी कोम के बिरसा मुंडा और दिवाली बेन भील का सम्मान सनातन संस्कृति का सम्मान*:*हार्दिक हुंडीया* 

जन्म से जैन पर सनातन धर्म में समभाव रखने वाले हार्दिक हुंडिया ने आदिवासी जाती के लिए हमेंशा सकारात्मक सोच के साथ कार्य किया है। क्योंकि वे मानते हैं वे पहले एक हीन्दुस्तानी है फिर जैन है। सनातन धर्म समभाव ही उनका मूलमंत्र है।
आदीवासी कोम के दो अनमोल मोती कहे जाने वाले महानुभाव में स्वंतत्रता सेनानी श्री बिरसा मुंडा इतिहास के पन्नों पर अमर हो गये। और पद्मश्री आदरणीय दिवाली बेन भील ने अपनी सुरीली आवाज़, सादगी और संस्कृति को सर पर पल्लू के रूप में कायम रखकर अपने लोकगीतो के माध्यम से वे विश्व प्रसिद्ध हुई।
यह एक संजोग है की हीरा माणेक ग्रुप के संस्थापक हार्दिक हुंडिया जी के हाथों से इन दोनों परम आदरणीय विभूति का सम्मान करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
बिरसा मुंडा एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए। उनके जीवन पर से आधारित फिल्म बिरसा मुंडा के उद्घाटन के अवसर पर हार्दिक हुंडीया जी खास झारखंड गये थे। फिल्म के ओपनिंग के बाद वे वंहा के बिरसा मुंडा परिवार के लोगों के साथ मिले, और महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को याद किया।
आदरणीय पद्मश्री दिवाली बेन भील जो गुजरात का गीत गुंजन थी, गुजरात की कोकिल कंठी, गुजरात का अनमोल अलंकार ऐसे अनेक उपनाम जिनके नाम के सामने छोटे हैं।
उनको दस साल पहले हार्दिक जी हुंडिया उनके गाये हुवे लोकगीतों से प्रेरित होकर जुनागढ़ जाकर उनका मातृ सम्मान कीया। उनके पैर दुध से पखालकर उनको सम्मानित करने कि सौभाग्य प्राप्त हुआ।उस समय जीवन में आखरी बार मारे टोडले बैठो मोर….. गाना उन्होंने गाया था। तब हार्दिक हुंडिया जी ने कहा था की आदरणीय दिवाली बेन भील में उनको माँ शबरी के दर्शन हुए हैं। उसी समय मन में उन्होंने आदरणीय दिवाली बेन भील की प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प लिया था।
और वो घड़ी आ गई
है , दिनांक २ जुन के दिन जुनागढ़ म्युनिसिपल कोर्पोरेशन को हीरा माणेक ग्रुप हार्दिक जी हुंडिया के नेतृत्व में आदरणीय पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा जुनागढ़ उनकी कर्मभूमि में स्थापित करने के लिए प्रदान कर रहे हैं । अपने आदर्श और लोकगीत से आमरण रहेंने वाली माँ शबरी समान दिवाली बेन की प्रतिमा जुनागढ़ के बस स्टेशन डेपो चोक में स्थापित होगी। उस चोक का नाम पद्मश्री दिवाली बेन भील चोक दिया जायेगा।
सर्व धर्म समभाव के मार्ग पर अग्रसर हार्दिक हुंडीया जी का आदीवासी कोम के लिए किये गये कार्य से संसार में आदिवासी कोम की उपलब्धि की नोंध ली जायेगी।






