हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना भी काम नहीं आया

हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना भी काम नहीं आया
चार बार लगातार एक ही आवेदक के टेंडर निरस्त करना पड़ा महंगा
इंदौर। सुपर कॉरिडोर (Super Corridor) स्थित 1 लाख 30 हजार स्क्वेयर फीट का विशाल और बेशकीमती भूखंड (prized plots) आखिरकार 83 करोड़ 40 लाख रुपए में एक ट्रस्ट को आबंटित करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में प्राधिकरण (IDA) द्वारा दायर की गई एसएलपी (SLP) बीते दिनों खारिज हो गई थी। उसके बाद सम्पदा शाखा को आबंटन की प्रक्रिया अभी पूरी करना पड़ी। दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट (indore high court) ने प्राधिकरण को निर्देश दिए थे कि वह उक्त ट्रस्ट का टेंडर मंजूर कर 30 दिन में आबंटन-पत्र सौंपे। मगर प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट चला गया, जहां उसे हार का मुंह देखना पड़ा। दरअसल, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर आपत्ति ली कि प्राधिकरण ने लगातार चार बार एक ही आवेदक यानी ट्रस्ट द्वारा जमा किए टेंडर को निरस्त कर दिया, जो कि उचित नहीं है। हर बार टेंडर प्राधिकरण द्वारा तय की गई राशि से अधिक कीमत के जमा किए गए।

हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना भी काम नहीं आया
चार बार लगातार एक ही आवेदक के टेंडर निरस्त करना पड़ा महंगा
इंदौर। सुपर कॉरिडोर (Super Corridor) स्थित 1 लाख 30 हजार स्क्वेयर फीट का विशाल और बेशकीमती भूखंड (prized plots) आखिरकार 83 करोड़ 40 लाख रुपए में एक ट्रस्ट को आबंटित करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में प्राधिकरण (IDA) द्वारा दायर की गई एसएलपी (SLP) बीते दिनों खारिज हो गई थी। उसके बाद सम्पदा शाखा को आबंटन की प्रक्रिया अभी पूरी करना पड़ी। दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट (indore high court) ने प्राधिकरण को निर्देश दिए थे कि वह उक्त ट्रस्ट का टेंडर मंजूर कर 30 दिन में आबंटन-पत्र सौंपे। मगर प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट चला गया, जहां उसे हार का मुंह देखना पड़ा। दरअसल, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर आपत्ति ली कि प्राधिकरण ने लगातार चार बार एक ही आवेदक यानी ट्रस्ट द्वारा जमा किए टेंडर को निरस्त कर दिया, जो कि उचित नहीं है। हर बार टेंडर प्राधिकरण द्वारा तय की गई राशि से अधिक कीमत के जमा किए गए।

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