*स्वर विज्ञान मे सफलता संभव
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श्री जैन प्राच्यविद्या अनुसंधान संगठन ( रजि ) द्वारा सुखदेवनगर मे आयोजित व्याख्यानमाला का शुभारंभ राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री देवेन्द्र सिंघई एवं संरक्षक श्री एम के जैन ने दीप प्रज्वलित कर किया, श्री मनोज जैन ने स्वर विज्ञान विषय पर सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वर विज्ञान भारत का एक प्राचीन विज्ञान है ये नासिक से होने वाले श्वास प्रवाह और ब्रह्मांडीय तथा ग्रहों के प्रभावों के बीच संबंध का अध्ययन करता है स्वर विज्ञान में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश का महत्वपूर्ण स्थान होता है स्वर विज्ञान द्वारा दैनिक कामों की सफलता के लिए संबंधित स्वर का प्रयोग कर सफलता प्राप्त की जा सकती है, आलोक जैन, डॉ सुशील जैन, पंकज जैन, प्रीति पाडलिया, सुषमा जैन, रेनु जैन उपस्थित थे संचालन मंजरी जैन ने किया आभार आर्या जैन माना
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