आरक्षण को संविधान की नौंवी सूची में डालने की मांग, समिति ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करे केंद्र सरकार

आरक्षण को संविधान की नौंवी सूची में डालने की मांग, समिति ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करे केंद्र सरकार*
सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी के कोटे में कोटा देने की व्यवस्था पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने और जरूरत पड़ने पर संसद में विशेष चर्चा बुलाकर कानून में संशोधन करते हुए आरक्षण को नौंवी सूची में डालने पर विचार करने की मांग की है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार से लंबे समय से लंबित 117 पदोन्नति में आरक्षण का बिल भी पास करने की मांग की है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक मंडल की कोर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण में आरक्षण दिए जाने के निर्णय पर चिंतन किया है। समिति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने कहा है कि राज्य अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण में आंकडों के आधार पर उपवर्गीकरण कर सकते हैं। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2004 में एक अपने फैसले में कहा था कि अनुसूचित जाति का उपवर्गीकरण नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने तब यह भी कहा था कि राज्यों के पास यह करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि अनुसूचित जाति की सूची राष्ट्रपति की ओर से बनाई जाती है। वहीं, इंदिरा साहनी के केस में भी माननीय सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यों वाली बेंच ने क्रीमी लेयर पर अपना मत स्पष्ट कर दिया था। सब मिलकर सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग जो निर्णय समय-समय पर दिए, उसको देखते हुए आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति मांग करती है कि वह सभी मामले को एकरूपता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट को याचिका देकर पुनर्विचार करना चाहिए। जरूरत पडने पर संविधान में पुनः संशोधन कर आरक्षण को नौंवी सूची में डालने पर भी विचार करें।

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