भारत को हजारों टन सौर कचरे से निपटना होगा

भारत को हजारों टन सौर कचरे से निपटना होगा*
नेट-जीरो लक्ष्य पाने के लिए भारत अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है। इससे 2030 तक विकसित होने वाली सौर ऊर्जा क्षमता से निकलने वाला सोलर कचरा 600 किलोटन तक पहुंच सकता है। यह 720 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल को भरने के बराबर होगा। ये जानकारियां काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की ओर से जारी एक नए अध्ययन में दी गई है। एक किलोटन दस लाख किग्रा होता है। अध्ययन के अनुसार, इस सोलर वेस्ट का ज्यादातर हिस्सा पांच राज्यों राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से आएगा। इसमें लगभग 10 किलोटन सिलिकॉन, 12-18 टन चांदी और 16 टन कैडमियम व टेल्यूरियम भी शामिल है, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिज हैं। यह भारत के लिए सोलर सेक्टर में सर्कुलर इकोनॉमी के एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभरने और सोलर सप्लाई चेन में लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए अच्छा अवसर है।

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