*श्रुति नाद समारोह मैं सजी लय और ताल की अनोखी महफ़िल
*
इंदौर। श्रुति संवाद संगीत समिति, अभिनव कला समाज एवं संस्कार भारती जिला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में मालवांचल के वरिष्ठ कलाकार स्व. श्री अरविंद अग्निहोत्री, स्व. डॉ. विवेक बंसोड़ एवं स्व. श्रीमती सविता गोडबोले की स्मृति में आयोजित श्रुति नाद संगीत सभा का कल समपान हुआ| वसंत संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने संस्कार भारती का ध्येय गीत एवं भजन गाकर भक्तिमयी शुरूआत की| नृत्य प्रस्तुति के पहले चरण में लयशाला पुणे के विद्यार्थियों ने मंच पर दुर्गा स्तुति का दर्शन किआ इसके बाद ताल पक्ष में ले बात दिखा कर शुद्ध कथक के साथ भाव भंगिमाओ से दर्शको को भाव विभोर किया| कथक नृत्य के दूसरे चरण में पुणे से विशेष तौर पर पधारी कथक नृत्यांगना श्रीमती आस्था गोडबोले कार्लेकर ने कथक नृत्य की बेहतरिन प्रस्तुति दी इक लम्बे अंतराल के बाद अपनी कथक प्रस्तुति से अपने दर्शकों को साधने मैं कामयाब रही| आस्था जी ने अपनी प्रस्तुति में परम्परागत अंदाज़ में आमद, बोल, टुकड़े, चक्करदार परान का प्रदर्शन किया| इसके बाद गोवर्धन पूजा आधारित गत भाव प्रस्तुत कर भक्ति रस से दर्शनों को प्रफुल्लित किया| आख़िरी में आपने लयकारी के साथ अपनी प्रस्तुति को अंजाम दिया| आपके प्रस्तुति में ख्यात गुरु सविता गोडबोलेजी का लखनवी अंग बखुबी दिखा| आपके साथ तबला पर श्री राहुल बने एवं हारमोनियम पर श्री रोहित अग्निहोत्री संगत की| अगली पेशकश मैं पुणे से पधारे श्री रोहित मुजुमदार जी का तबला एकल वादन हुआ| आपने विलम्बित तीन ताल में बेहद प्रभावशाली अंदाज़ में पेशकार, कायदा, और रेला प्रस्तुति किआ| आपकी उंगलियों का जादू तबले पर सर चढ़ कर बोल रहा था | अपने खास अंदाज़ में ख्यात ताल योगी एवं वरिष्ठ तबला गुरु पं. सुरेश तलवलकर जी के अंदाज़ से बोलो कि निकसी में आपने साफगोई बरती| आपके साथ हारमोनियम संगत की श्री दीपक खसरावल ने|कार्यक्रम का शुभारम्भ ख्यात नृत्य गुरु सुभाष चद्र भट्टाचार्य, पं दीपक गरुड़, पं. प्रकाश खानविलकर एवं पूर्व पार्षद श्रीमती। मेघा खानविलकर के कर कमलों से हुआ| अतिथियों का स्वागत किया श्रुति संवाद के श्री सत्यकाम शास्त्री, पं. सुनील मसुरकर, श्री विश्वास पूरकर, डॉ. प्रशांत बंसोड़, श्री विलास सप्रे,श्री दिलीप मुंगी, श्री बालकृष्ण सनेचा ने किआ | कार्यक्रम संचालन श्री रोहित अग्निहोत्री ने किया| आभार डॉ. शिल्पा मसुरकर एवं डॉ. पूर्वी निमगावकर ने माना|
1876 views





