भारत को श्रेष्ठ बनाएंगे तीन स्वप्न.., वो भाषण जब डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने बताई थीं करियर की चार उपलब्धियां

भारत को श्रेष्ठ बनाएंगे तीन स्वप्न.., वो भाषण जब डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने बताई थीं करियर की चार उपलब्धियां*
विनम्र व्यक्तित्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के धनी थे पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम। विज्ञान जगत में देश का नाम रोशन करने वाले मिसाइलमैन डा. अब्दुल कलाम के समस्त कार्य व शब्द प्रेरक थे।भारत के संदर्भ में मेरे तीन स्वप्न हैं। हमारे इतिहास के 3,000 साल में समस्त विश्व से लोग यहां आए, हमारे ऊपर आक्रमण किया, हम पर आधिपत्य स्थापित किया और हमारे मस्तिष्क को गुलाम बनाया। अलेक्जेंडर से लेकर तुर्क, मुगल, पुर्तगाली, ब्रिटिश, फ्रांसीसी, डच- ये सभी यहां आए, हमें लूटा और जो कुछ हमारा था, उस पर कब्जा कर लिया, लेकिन हमने किसी अन्य राष्ट्र के साथ ऐसा कभी नहीं किया।हमने किसी को जीतकर गुलाम नहीं बनाया। हमने उसकी जमीन पर अपना कब्जा नहीं किया, उनकी संस्कृति और इतिहास को नष्ट नहीं किया और न ही अपनी जीवनशैली को उन पर थोपने का प्रयास किया। क्योंकि हम दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, इसीलिए मेरा पहला स्वप्न स्वतंत्रता का है। मेरा मानना है कि भारत ने स्वतंत्रता का पहला स्वप्न वर्ष 1857 में देखा। हमें हर हाल में इस स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए, उसकी जड़ों को मजबूत बनाना चाहिए। यदि हम स्वतंत्र नहीं रहेंगे तो कोई भी हमारा सम्मान नहीं करेगा।

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