रोजमर्रा की चीजें बेचने के लिए केमिस्टों को बनवाना ही होगा फूड लाइसेंस, नहीं तो होगा जुर्माना*
अलीगढ़ में मेडिकल स्टोर संचालक अब ड्रग लाइसेंस पर प्रोटीनेक्स, हेल्थ टानिक, च्यवनप्राश, शहद, मिल्क पाउडर, शुगर फ्री टेबलेट, ग्लूकोज व अन्य हेल्थ सप्लीमेंट और रोजमर्रा की चीजें नहीं बेच सकेंगे। इसके लिए अलग से पंजीकरण या फूड लाइसेंस लेना ही होगा, अन्यथा ड्रग लाइसेंस रद कर दिया जाएगा। जुर्माना भी वसूला जाएगा। खाद्य विभाग इतना गंभीर है कि नई व्यवस्था को अपनी 100 दिन की कार्ययोजना में शामिल किया है। औषधि विभाग सिर्फ दवा बिक्री का लाइसेंस देता है, लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक फूड सप्लीमेंट व अन्य खाद्य वस्तुएं बेच रहे हैं। जनपद में लगभग 2500 मेडिकल स्टोर हैं। 99 प्रतिशत के पास फूड लाइसेंस नहीं है। नजर डालें तो काउंटर पर ही फूड सप्लीमेंट रखे दिख जाएंगे। विगत वर्ष ही इनकी बिक्री के लिए फूड लाइसेंस के निर्देश निर्गत किए गए थे। पूर्व में यह व्यवस्था एक अक्टूबर 2021 से लागू होनी थी, बाद में यह तिथि एक जनवरी-2022 तक बढ़ा दी गई। फिर भी, संचालकों ने फूड लाइसेंस नहीं लिए। वे अलग-अलग लाइसेंस की आड़ में उत्पीड़न व अन्य परेशानी होने का तर्क देते रहे। अफसरों के अनुसार पेय या खाद्य सामग्री बेचने के लिए लाइसेंस अथवा पंजीकरण अनिवार्य है। ऐसा न करना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी आफ इंडिया (एफएसएसएआइद) के नियमों के विपरीत है। 12 लाख तक के वार्षिक कारोबार पर पंजीकरण व इससे अधिक पर निर्धारित शुल्क जमा करके लाइसेंस लेने का प्रविधान है।






