चेन्नई की गम्भीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए भूजल भण्डारण और पर्यावरण संरक्षण हेतु कुछ सुझाव डॉ. मनोहर भण्डारी

चेन्नई की गम्भीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए भूजल भण्डारण और पर्यावरण संरक्षण हेतु कुछ सुझाव
डॉ. मनोहर भण्डारी
• पूरे देश में होने वाले प्रत्येक नवनिर्माण (रहवासी, अथवा व्यावसायिक, व्यक्तिगत अथवा शासकीय) में वर्षा जल संग्रहण अनिवार्य किया जाए I
• पहले से बने घरों, भवनों में शासन-प्रशासन वर्षा जल संग्रहण हेतु कोई ऐसी प्रक्रिया का आविष्कार करें, जिससे कम खर्च और कम तोड़फोड़ में वर्षाजल संग्रहण का कार्य सम्भव हो सकें I
• देश के सभी नगरों, कस्बों, गांवों के सभी उद्यानों में कम से कम चार बड़े-बड़े सोकपिट्स का निर्माण अनिवार्य रूप से किया जाए, बड़े उद्यानों में अधिक संख्या में सोकपिट्स का निर्माण किया जाना उचित रहेगा I
• ऐसे उद्यान जिनका क्षेत्रफल अधिक हो, वहां चारों ओर देसी और बड़े वृक्ष (गूलर, पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन आदि) साथ ही अनिवार्य रूप से आम, जामुन, कटहल, अमरुद, सीताफल जैसे फलदार वृक्ष भी लगाएं जाएं, कोई भी खाएगा तो सुपोषण ही तो होगा, पक्षी खाएंगे तो वे अन्यत्र पौधरोपण करते रहेंगे I पक्षियों को घर बनाने के लिए निरापद स्थान देने का कार्य भी सहजीवन के तहत हमारा ही है I
• बड़े वृक्षों के रोपण के पूर्व दस फीट का गड्ढा पाइल से खुदवाना चाहिए और फिर बोल्डर, रेती आदि से भराव कर ऊपर के दो फीट में खाद-मिट्टी डाल कर पौधा लगाया जाए ताकि उनकी जड़ें भविष्य में सदा के लिए रिचार्जिंग पाइप की तरह भूजल भण्डारण का कार्य कर सकें I यह अनुभूत प्रयोग है I
• एक निवेदन है कि ऐसे बगीचों की फेंसिंग अथवा बाउण्ड्री वाल के बाहर बड़े पेड़ रोपे जाना चाहिए, जहां सड़कें अत्यधिक चौड़ी हों I ऐसी स्थिति में बड़े पेड़ों का रोपण दोनों तरफ करने से हवा भी स्वच्छ होगी, छाया मिलने से नागरिकों को भी राहत मिलेगी, इसके अतिरिक्त छाया और शीतल हवा मन को भी सकारात्मक करने में सक्षम होती है I साथ ही विभिन्न प्रकार के पक्षियों का कलरव बच्चें नित्य सुन सकेंगे I
• जहां भी वाटर सप्लाई के हाइड्रेन्ट हैं अथवा हैण्ड पंप हैं, वहां भी सोकपिट बनाए जाएं I कुँओं के पास भी सोकपिट बनाने अनिवार्य होना चाहिए, वहां ढूलने वाला पानी भूजल में परिणत हो सकेगा I
• हर बगीचे में पक्षियों को दाना डालने हेतु कुछ निरापद (कुत्तें-बिल्लियों से रक्षा की दृष्टि से) रचना की जाए ताकि सहजीवन हेतु नागरिक अपने बच्चों में दाना-पानी देने हेतु संस्कार डाल सकें I
• राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य लम्बे मार्गों के दोनों तरफ आधा-आधा किलोमीटर पर दोनों तरफ बड़े-बड़े सोकपिट बनाएं जाएं, ताकि भूजल भण्डार समृद्ध हो सकें और सड़कों के किनारे के खेतों की भूमि नमी बनी रहे, तथा रहवासियों के बोरिंग भी सदैव जल देते रहेंगे I
• शहरों को जोड़ने वाले मार्गों के दोनों तरफ राजा-महाराजाओं की परम्पराओं का अनुसरण करते हुए फलदार वृक्षों के बड़े रोपों का रोपण करना चाहिए, ताकि वे गर्म हवाओं को तनिक ठण्डा करने में सक्षम हो सकें I
• सभी स्कूल, कॉलेजों, पंचायतों में अधिकाधिक देसी, बड़े और दीर्घायु वृक्षों का रोपण किया जाना अनिवार्य किया जाए, अध्ययन कहते हैं कि वृक्षों के सानिध्य से क्रोध, अवसाद, निराशा का शमन होता है, जो कि विद्यार्थियों के लिए आवश्यक भी है I
• समस्त शौकिया अथवा निवेश हेतु क्रय किए गए फार्म हाउसेस में उनके आकार के अनुपात में निश्चित संख्या में देसी वृक्षों का रोपण करना अनिवार्य किया जाए I
• यदि हमें खेती की धरती को सीमेंट-कांक्रीट के आत्मघाती आघातों से बचाना है तो घरों-फ्लैटों-फार्म हाउस की रजिस्ट्री को आधारकार्ड, पैन कार्ड और समग्र कार्ड से जोड़ा जाए तथा एक परिवार को दो या तीन से अधिक घरों-फ्लैटों-फार्म हाउस की अनुमति कदापि नहीं दी जाए, इससे मध्यमवर्गीय नागरिकों के लिए अपना स्वयं का घर बनवाना थोड़ा सस्ता हो जाएगा I

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