शासन के बूते मेडीकल कॉलेज की स्थापना

शासन के बूते मेडीकल कॉलेज की स्थापना

महाकाल जी नगरी में शासकीय स्तर पर मेडीकल कॉलेज खोलने की घोषणा से उज्जैन के भाल पर एक और तिलक लग गया! मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को उज्जैन में इस संबंध में एक युगांतकारी घोषणा की. मगर, उनके भोपाल पहुंचने से पहले बयानबाजी का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने स्थानीय मीडिया नेटवर्क को चकरा दिया. इस तरह के प्रपंचों के जरिये कागज के बागड़-बिल्लों ने उज्जैन को मिले इस उपहार का श्रेय लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी!

इंदौर के समीप स्थित होने के कारण उज्जैन का संभागीय मुख्यालय हमेशा बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का प्यासा रहा है। वर्ष 2000 में जब (अविभाजित) मध्य प्रदेश का पहला निजी क्षेत्र का मेडीकल कॉलेज आरडी गार्डी मेडीकल कॉलेज के रूप में खोला गया, तो उम्मीदों को गति मिली कि क्षेत्र के लोगों को उचित सुविधाएं मिले सकेंगीं! हालांकि, बीते 20 वर्षों में क्षेत्रवासियों का अनुभव प्राय: कसैला ही रहा. इस बीच इंदौर को निजी क्षेत्र में कई मेडीकल कॉलेज के अलावा लगभग पांच दर्जन अल्ट्रा-मॉडर्न अस्पताल मिल गए।

राज्य में 2003 से भाजपा सत्ता में है और केंद्र में पार्टी की सरकार भी 2014 में पूर्ण सत्ता में आई, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर सरकारी क्षेत्र में एक पूर्ण व्यवस्थित चिकित्सा अस्पताल की स्थापना का कोई प्रतिफल आम लोगों को नहीं दिया जा सका! हालांकि इस संबंध में जनप्रतिनिधि बनने की होड़ में शामिल लोगों की ओर से समय-समय पर आवाज उठाई गई, लेकिन यह सब चुनाव के दौरान जनसमर्थन प्राप्त करने की कवायद तक सिमट गई। कालांतर में भोपाल को एम्स मिल गया और नीतिगत पाबंदी के बावजूद इंदौर ने भी एम्स मांग लिया, पर उज्जैन के जनप्रतिनिधि एम्स की मांग उठाने तक में लाचार नजर आए।

यह सच है कि उज्जैन उत्तर के भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री पारस जैन, सांसद अनिल फिरोजिया और उज्जैन दक्षिण के विधायक तथा वर्तमान उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने महामारी के समय में मेडीकल कॉलेज खोलने की आवश्यकता को स्वर दिए। हालाँकि, ऐसे सभी प्रयास व्यर्थ ही साबित हुए क्योंकि उन्हें राज्य सरकार का समर्थन नहीं मिला और केंद्र सरकार के नीतिगत कारकों के चलते भी रास्ते में कांटे ही बिछते रहे!

सरकार के बूते मेडीकल कॉलेज की स्थापना कोई आसान काम नहीं है! इस तरह की घोषणा को अंजाम देने के लिए उच्च राजनीतिक इच्छाशक्ति के अलावा इसके लिए विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी ली जानी पड़ती हैं। पूरी प्रक्रिया में वित्तीय मुद्दे भी हावी होने की संभावना प्रबल है ही! बावजूद इसके, अगर सब कुछ उज्जैनियों के पक्ष में जा रहा है (???) तो भी इस सपने को साकार करने का पूरा श्रेय “कोरोना” को देना श्रेयस्कर होगा!

(छवि: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को उज्जैन संभाग में कोरोना संक्रमण से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए बृहस्पति भवन में प्रवेश करते हुए)

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