अश्लीलता परोसने वाले ओटीटी पर नियमन – नियंत्रण की लगाम जरूरी

अश्लीलता परोसने वाले ओटीटी पर नियमन – नियंत्रण की लगाम जरूरी

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री को मालू ने पत्र लिखकर कहा कि मनोरंजन की जगह मनोरोग परोस रहे

मनोरंजन का नया माध्यम ‘ओवर द टॉप’ (ओटीटी) हमारे सामाजिक मूल्यों और संस्कृति को नष्ट कर रहा है। युवाओं को स्वछंद बनाकर, दिग्भ्रमित कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ की साजिश कर रहा है। इससे अपराध के साथ समाज मे व्यभिचार बढ़ रहा है। इसका नियमन और नियंत्रण बेहद जरूरी है।
इस आशय का पत्र केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखते हुए खनिज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष श्री गोविंद मालू ने मांग की है कि इसके लिए नीति बनाई जाए।
आपने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में ऑन लाइन कंटेंट रेगुलेटरी स्कीम, सिंगापुर में नियमन अथॉरिटी और तुर्की में मीडिया सर्विसेज पर रेडियो टेलीविजन की सुप्रीम कौंसिल नियंत्रण करती है। यहां इंटरनेट प्रदाता कम्पनियों को ही कंटेंट की मॉनिटरिंग और नियमन अनिवार्य कर चोर के हाथ में चाबी दे दी गई। जबकि, हमारे यहां आईटी एक्ट की धारा 67 और 69 के भरोसे ऐसे कन्टेन्ट के ओवरडोज़ को छोड़ दिया गया! इसके लिए अलग से सेंसर बोर्ड बनाकर ही प्रसारण की अनुमति जैसा नियमन और नियंत्रण की पहल करना होगी। इससे मनोरंजन की जगह अश्लील सामग्री और कुतर्क कहानियों से मनोरोग हो रहा है और हमारा सामाजिक ताना बाना बिगड़ रहा है। युवा मनोरोग का शिकार हो रहे हैं।
आपने कहा कि इस बारे में सरकार शीघ्र विचार कर एक पीढ़ी को तो बचाए, नव- अपराध से भी समाज को बचाए।

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