*बिजली से लेकर तेल कारोबार तक की मुनाफे वाली इन 5 कंपनियाें को क्यों बेच रही सरकार ?*
केंद्र सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) समेत पांच कंपनियों के विनिवेश का फैसला किया है. ये सभी कंपनियां मुनाफे में हैं और बिजली उत्पादन से लेकर पावर प्लांट के लिए गैस आपूर्ति जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रही हैं.
केंद्र सरकार ने 5 पीएसयू में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया हैगौर करने की बात यह है कि ये सभी सरकारी कंपनियां मुनाफे में चल रही हैंये बिजली उत्पादन से लेकर पावर प्लांट के लिए गैस आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण काम में लगी हैंसरकार ने इस साल पीएसयू के विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है
केंद्र सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) समेत पांच कंपनियों के विनिवेश का फैसला किया है. सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से कई कंपनियों में मैनेजमेंट कंट्रोल भी सरकार ने छोड़ने का फैसला किया है. हैरत की बात यह है कि *ये सभी कंपनियां मुनाफे में हैं* और बिजली उत्पादन से लेकर पावर प्लांट के लिए गैस आपूर्ति जैसे कई महत्वपूर्ण-संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रही हैं. आइए जानते है कि ये कंपनियां क्या करती हैं और इनका कारोबार कैसा है.
बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस पर निर्णय के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) में 53.29 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का फैसला किया है, इसमें नुमालीगढ़ रिफाइनरी की 61 फीसदी हिस्सेदारी शामिल नहीं है. नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन में सौ फीसदी विनिवेश होगा, यानी इसका पूरा हिस्सा सरकार बेच देगी. बीपीसीएल और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन के अलावा जिन और तीन कंपनियों में विनिवेश का फैसला किया गया है, वे हैं- शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और टीएचडीसीआईएल.
सरकार के हाथ तंग हैं और राजकोषीय घाटा लक्ष्य के अनुरूप नहीं है. सरकार ने इस वित्त वर्ष यानी 2018-19 में विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है. इस साल सरकार ने टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य 24.6 लाख करोड़ रुपये रखा है, लेकिन अर्थव्यवस्था की सुस्ती को देखते हुए यह *संग्रह लक्ष्य से 2 लाख कराेड़ रुपये कम* रहने की आशंका है.
इसके अलावा, सरकार ने हाल में कॉरपोरेट टैक्स में भारी कटौती कर दी है. इससे सरकार पर करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा, जिसकी भरपाई करनी जरूरी है. सरकार पैसा जुटाने के लिए विनिवेश का सहारा इसलिए लेना पसंद करती है कि यह ब्याजमुक्त धन होता है, जबकि कर्ज लेने पर बड़ी रकम ब्याज के रूप में चुकानी पड़ती है. सरकार ने इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 3.3 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह 3.8 फीसदी तक हो जाने की आशंका है.
*1. मोटे मुनाफे वाले BPCL से मिलेगी मोटी रकम*
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) एक महारत्न पीएसयू है. इसका हिस्सा बेचने से सरकार को करीब 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मोटी रकम मिल सकती है. वित्त मंत्री ने हाल में कहा था कि BPCL का विनिवेश मार्च 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा. सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य रखा है. BPCL में सरकार की 53.29 फीसदी हिस्सेदारी है और इस कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर है. तो बीपीसीएल की बिक्री से उसे अकेले इस लक्ष्य का करीब 60 फीसदी हिस्सा हासिल हो जाएगा. वित्त वर्ष *2018-19 में बीपीसीएल को 7,132 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था.*
*2. पावर प्लांट, केमिकल इंडस्ट्री को ईंधन सप्लाई करने वाली महत्वपूर्ण कंपनी है SCI*
शुरुआत से ही यह मुनाफे में रहने वाली कंपनी है. इसको साल 2008 में नवरत्न कंपनी का दर्जा दिया गया था.यह LNG का ट्रांसपोर्टेशन करने वाली एकमात्र कंपनी है जो देश के पावर प्लांट, केमिकल/पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है. 31 मार्च 2019 के पिछले वित्त वर्ष में कंपनी को कुल *4,144.09 करोड़ रुपये की आय और 121.99 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा* हुआ था. इसमें सरकार की 63.75 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे वह पूरी तरह से बेच देगी.
*3. पूर्वोत्तर भारत को बिजली से रोशन करती है NEEPCO*
इसके द्वारा 7 हाइड्रो, 3 थर्मल और 1 सोलर पावर स्टेशन का संचालन किया जाता है जिनकी कुल स्थापित क्षमता 1457 मेगावॉट है. वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी को कुल *2007.04 करोड़ रुपये की आय* हुई थी और 451.58 करोड़ रुपये का कर पूर्व मुनाफा (PBT) हासिल हुआ था. इसके पिछले वित्त वर्ष में कंपनी को 402.71 करोड़ रुपये का कर पूर्व मुनाफा हुआ था. इसमें सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है और वह पूरी हिस्सेदारी बेचेगी.
*4. देश के भीतर माल ढुलाई की धमनी है CONCOR*
इसके पास 84 इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) का विशाल नेटवर्क है. यह एक नवरत्न कंपनी है. वित्त वर्ष *2018-19 में कंपनी को कुल 7216 करोड़ रुपये की आय* और 1215 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था. इसमें सरकार की 54.8 फीसदी हिस्सेदारी है जिसमें से वह 30.8 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी.
*5. टिहरी में बिजली पैदा करने वाली मिनी रत्न THDCIL*
इसे भारत सरकार ने मिनी रत्न का दर्जा दिया है. वित्त वर्ष *2018-19 में कंपनी को कुल 2,223.19 करोड़ रुपये की आय* और 771.16 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है. केंद्र सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच देगी.






