आरबीआई का बड़ा कदम: देश में प्लास्टिक नोटों की तैयारी
भारतीय रिज़र्व बैंक ने देश में करेंसी नोटों की सुरक्षा और उनकी उम्र बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा क़दम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने आज नोटों के निर्माण के लिए आवश्यक ‘ओपेसिफाइड पॉलिमर सब्सट्रेट शीट’ की सप्लाई करने वाली कंपनियों से वैश्विक स्तर पर निविदाएँ आमंत्रित की हैं। साफ़ है कि भारत में जल्द ही प्लास्टिक बैंक नोट देखने को मिल सकते हैं।
पारंपरिक भारतीय नोट मुख्य रूप से कपास से बने विशेष काग़ज़ पर छापे जाते हैं। इसके विपरीत, प्लास्टिक या पॉलिमर नोट एक विशेष सिंथेटिक प्लास्टिक सामग्री से बने होते हैं।
ये नोट छूने और दिखने में काफ़ी हद तक सामान्य नोटों जैसे ही होते हैं, लेकिन इनमें पारदर्शी विंडो और एडवांस होलोग्राफिक फ़ीचर जैसे आधुनिक सुरक्षा उपाय आसानी से शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना बेहद मुश्किल होता है।
प्लास्टिक नोटों को अपनाने पर विचार करने के दो मुख्य कारण हैं: स्थायित्व और सुरक्षा।
काग़ज़ी नोट पसीने, पानी और रगड़ से जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे आरबीआई को हर साल पुराने नोटों को बदलने और नए नोट छापने पर भारी ख़र्च करना पड़ता है। इसके विपरीत, प्लास्टिक नोट वाटरप्रूफ़ भी होते हैं और आसानी से कटते फटते नहीं।इसके अलावा, इन नोटों में बेहद जटिल सुरक्षा विशेषताएँ होती हैं, जिससे जाली नोट पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी।






