महासंघ बैठक में जिम्मेदारी से बचने के आरोप, क्षमायाचना पर टला निर्णय

*महासंघ बैठक में जिम्मेदारी से बचने के आरोप, क्षमायाचना पर टला निर्णय*
इंदौर। श्वेतांबर जैन महासंघ न्यास की हालिया बैठक एक बार फिर विवादों और तीखी चर्चाओं के बीच संपन्न हुई। बैठक में उपस्थित कई न्यासियों ने आरोप लगाया कि महासंघ नेतृत्व अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और उनसे उपजे विवादों की जिम्मेदारी लेने के बजाय विषय को भटकाने की रणनीति अपनाता नजर आया।
न्यासियों का कहना था कि महावीर जन्म कल्याणक के आयोजन में हुई व्यवस्थागत चूकों और विवादों पर आत्ममंथन और पश्चाताप अपेक्षित था, लेकिन इसके बजाय बैठक को सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों और प्रतिक्रियाओं की ओर मोड़ दिया गया। कई सदस्यों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि समाज के सुधि श्रावक सवाल उठा रहे हैं, तो उनका जवाब देना और आवश्यक हो तो क्षमायाचना करना संगठन की नैतिक जिम्मेदारी है। “क्षमायाचना से बड़ा कोई मार्ग नहीं होता,” यह बात भी बैठक में प्रमुखता से रखी गई।
नवकारसी आयोजन को लेकर भी विवाद गहराया रहा। एक जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा इवेंट कंपनी की भूमिका को लेकर उत्पन्न विवाद को समाप्त करने हेतु स्वयं पहल करते हुए नेतृत्व से चर्चा कर क्षमायाचना पत्र जारी करने तक की सहमति बनाए जाने की बात कही थी सामने आई। , इस संदर्भ में उस पदाधिकारी की ऑडियो भी सार्वजनिक होने की चर्चा रही, जिसमें माफी पत्र जारी करने की बात कही गई थी।
हालांकि, सवाल यह खड़ा हुआ कि जब सहमति बन चुकी थी, तो फिर क्षमायाचना पत्र जारी क्यों नहीं किया गया? इस मुद्दे पर बैठक में स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका, जिससे असंतोष और गहरा गया।
न्यासियों ने यह भी आरोप लगाया कि वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास किया गया और चर्चा को भटकाकर मूल मुद्दों से ध्यान हटाया गया। बैठक के दौरान यह प्रश्न सबसे प्रमुख बनकर उभरा कि आखिर महासंघ नेतृत्व क्षमायाचना जैसे धार्मिक और नैतिक कर्तव्य को निभाने से पीछे क्यों हट रहा है।
बैठक बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गई, जबकि इन मुद्दों पर समाज के भीतर चर्चा और भी तेज होती जा रही है।

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