अपेक्षा, विश्वास और स्पष्टता का समय — महासंघ नेतृत्व से समाज की सकारात्मक अपील

*अपेक्षा, विश्वास और स्पष्टता का समय — महासंघ नेतृत्व से समाज की सकारात्मक अपील*

श्वेतांबर जैन समाज की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था के रूप में महासंघ की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, समन्वय और विश्वास की आधारशिला के रूप में रही है। महासंघ के अध्यक्ष श्री विजय जी मेहता को समाज ने जो नेतृत्व सौंपा है, वह केवल एक पद नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भावनाओं और अपेक्षाओं का दायित्व है।
विगत वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव का आयोजन महासंघ के नेतृत्व में जिस अनुकरणीयता, गरिमा और व्यापक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ, वह समाज की एकजुटता और सक्षम नेतृत्व का प्रमाण रहा। आयोजन में कुछ छोटी-मोटी त्रुटियां यदि कहीं रहीं भी हों, तो उन्हें अपवाद स्वरूप ही देखा गया। समग्र रूप से यह उत्सव समाज के इतिहास में एक श्रेष्ठ और प्रेरणादायक आयोजन के रूप में स्मरणीय रहेगा। इसके लिए महासंघ और आपके नेतृत्व को समाज की ओर से साधुवाद प्राप्त हुआ।
किन्तु वर्तमान में सोशल मीडिया और समाज के विभिन्न वर्गों में महासंघ की बैठकों के एजेंडा को लेकर कुछ प्रश्न और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। दो प्रकार के एजेंडा की चर्चा और उससे उपजे संवाद ने समाज के भीतर जिज्ञासा और कुछ हद तक असमंजस की स्थिति निर्मित की है। यह स्थिति न तो महासंघ के लिए उचित है और न ही समाज की एकता के लिए।
महासंघ का मूल दायित्व समाज की एकता को अक्षुण्ण बनाए रखना और समाज के प्रत्येक वर्ग में विश्वास और समन्वय स्थापित करना है। यदि किसी प्रकार की गलतफहमी उत्पन्न हुई है, तो उसे दूर करना भी नेतृत्व की नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। समाज यह अपेक्षा करता है कि महासंघ का नेतृत्व स्वयं आगे आकर इन विषयों पर स्पष्टता प्रदान करे, जिससे किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम का निराकरण हो सके।

विशेष रूप से संविधान में संभावित �

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